नई दिल्ली । तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चुनाव आयोग से अंतिम फैसला लेने की समयसीमा बताने को कहा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची व वी. मोहना की पीठ ममता बनर्जी की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने आयोग के टीएमसी के नाम और ‘फूल और घास’ वाले चुनाव चिह्न को फ्रीज करने के फैसले को चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू से पूछा कि आयोग विवाद का अंतिम निपटारा कब तक कर सकता है। अदालत ने ममता बनर्जी की याचिका पर अगली सुनवाई 28 सितंबर को तय की है।
सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि आयोग ने चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के दौरान नाम और चिह्न फ्रीज करने का फैसला किया, जिससे उनकी पक्ष के पास प्रभावी राहत का रास्ता नहीं बचा। उन्होंने आयोग की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुझाव दिया कि आयोग को मामले की सुनवाई शुरू करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आयोग कुछ समय तक रोजाना सुनवाई कर सकता है और दोनों पक्षों को अपने सबूत व दस्तावेज पेश करने का मौका देकर विवाद पर फैसला कर सकता है।
6 अक्तूबर को पश्चिम बंगाल में विधानसभा उपचुनाव होना है। जस्टिस बागची ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। इस पर सिब्बल ने कहा कि वह चुनाव पर रोक लगाने की मांग नहीं कर रहे हैं। दरअसल, चुनाव आयोग ने अंतरिम फैसले के तहत दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं। दोनों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम इस्तेमाल करने से रोक दिया गया है और मूल चुनाव चिह्न को फिलहाल सुरक्षित रखा गया है। आयोग का कहना है कि विवाद का अंतिम फैसला चुनाव चिह्न आदेश, 1968 के तहत विस्तृत सुनवाई के बाद किया जाएगा।
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