पाकिम : दिव्यांगजनों के पुनर्वास, सशक्तिकरण और सामाजिक समावेशन को लेकर सोमवार को डीडीएमए कंट्रोल हॉल में जिला कलेक्टर परी बिश्नोई की अध्यक्षता में पहली जिला स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई।
इस समिति में जिला कलेक्टर (अध्यक्ष) के साथ एसडीएम (मुख्यालय ) थेंदुप लेप्चा; सीएमओ डॉ. मदनमणि ढकाल; सिंगताम जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ विभूषण दहाल; संबंधित जिले के लोक अभियोजक; एनजीओ ‘सारथी’ के प्रतिनिधि; दीर्घकालिक शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक अथवा संवेदी दिव्यांगता वाले व्यक्ति तथा महिला, बाल, वरिष्ठजन एवं दिव्यांग विकास विभाग के जिला समाज कल्याण अधिकारी को सदस्य सचिव के रूप में शामिल किया गया है।
बैठक में दिव्यांगों के पुनर्वास, अधिकारों की रक्षा, सशक्तिकरण और समाज की मुख्यधारा में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेष रूप से जमीनी स्तर पर दिव्यांगजनों तक सरकारी सुविधाएं पहुंचाने और सार्वजनिक स्थानों तथा सेवाओं को उनके लिए सुगम बनाने पर जोर दिया गया।
जिला कलेक्टर परी बिश्नोई ने कहा कि जिले के सभी दिव्यांगजनों की पहचान कर उन तक पहुंचने के लिए विभिन्न विभागों को समन्वित रूप से क्षेत्र स्तर पर कार्य करना होगा। उन्होंने ग्राम स्तर पर विशेष शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए, जिनमें दिव्यांगजनों की पहचान, स्वास्थ्य जांच, दिव्यांगता का आकलन, विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र यानी यूडीआईडी कार्ड बनाने तथा सहायक उपकरण वितरित करने की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि पात्र लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं, आर्थिक सहायता और अन्य सुविधाओं का लाभ दिलाने के लिए यूडीआईडी कार्ड बेहद महत्वपूर्ण है।
डीसी ने दिव्यांग अधिकार कानून की धारा 72 के प्रावधानों की जानकारी देते हुए समिति के दायित्वों को भी रेखांकित किया। उन्होंने जिला प्रशासन के अधीन सभी विभागों से दिव्यांगजनों के लिए उपलब्ध योजनाओं, कानूनी अधिकारों और सुविधाओं के बारे में व्यापक जागरूकता अभियान चलाने का आग्रह किया।
बैठक में बताया गया कि समिति जिला प्रशासन को दिव्यांगजनों के पुनर्वास और सशक्तिकरण से संबंधित मामलों में सलाह देगी। इसके साथ ही दिव्यांगजन अधिकार कानून और उसके तहत बनाए गए नियमों के क्रियान्वयन की निगरानी, सरकारी योजनाओं एवं कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में सहायता तथा अधिनियम के प्रावधान लागू नहीं होने से संबंधित शिकायतों की जांच भी करेगी।
समिति शिकायतों के समाधान के लिए आवश्यक सुधारात्मक उपायों की अनुशंसा करेगी। इसके अलावा सरकारी प्रतिष्ठानों के उन कर्मचारियों की अपीलों पर भी विचार किया जाएगा, जो कानून की धारा 23 की उपधारा चार के तहत की गई कार्रवाई से प्रभावित हैं। समिति की बैठक कम से कम प्रत्येक तीन महीने में एक बार आयोजित की जाएगी।
वहीं, महिला, बाल, वरिष्ठजन एवं दिव्यांग विकास विभाग की उपनिदेशक डिकित लेप्चा ने विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री राज्य दिव्यांगता पेंशन योजना के तहत सिक्किम में 40 से 80 प्रतिशत तक दिव्यांगता वाले पात्र व्यक्तियों को प्रतिमाह आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। वहीं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांगता पेंशन योजना के तहत भी पात्र लाभार्थियों को वित्तीय सहायता दी जाती है। उन्होंने दिव्यांग व्यक्ति से विवाह के लिए सिक्किम सरकार की अनुदान योजना की जानकारी देते हुए बताया कि इसके तहत दो लाख रुपये की एकमुश्त सहायता राशि प्रदान की जाती है।
लेप्चा ने यूडीआईडी कार्ड के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसके माध्यम से दिव्यांगजन विभिन्न सरकारी योजनाओं, सेवाओं और सुविधाओं का लाभ आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने पात्र लाभार्थियों के बीच सहायक उपकरणों के वितरण और जिले में जमीनी स्तर पर चलाए जा रहे जागरुकता एवं संपर्क अभियानों की भी जानकारी दी।
बैठक में दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आजीविका सहायता मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। सदस्यों ने कौशल विकास प्रशिक्षण, आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता और स्वरोजगार शुरू करने के लिए वित्तीय एवं तकनीकी सहायता प्रदान करने की आवश्यकता बताई। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए योजनाओं का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।
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