‘फ्राइडे सेफ्टी फाइव’ से बच्चों में विकसित होगी आपदा से निपटने की आदत

गेजिंग : बच्चों की दैनिक शिक्षा व्यवस्था में आपदा प्रबंधन और सुरक्षा संबंधी जागरुकता को शामिल करने के उद्देश्य से बुधवार को गेजिंग जिला जिला पंचायत भवन में ‘फ्राइडे सेफ्टी फाइव : हर शुक्रवार पांच मिनट, जीवनभर की सुरक्षा’ विषय पर जिला स्तरीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया।

सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसएसडीएमए) और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में जिले के विभिन्न सरकारी स्कूलों के नोडल शिक्षकों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को व्यावहारिक ज्ञान एवं कौशल प्रदान करना था, ताकि वे प्रत्येक सप्ताह बच्चों को आपदा जोखिम न्यूनीकरण, सुरक्षा उपायों और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की जानकारी दे सकें।

कार्यक्रम में गेजिंग जिला कलेक्टर सह डीडीएमए चेयरमैन तेनजिंग डी. डेन्जोंग्पा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों में नियमित जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों में आपदा से निपटने की संस्कृति विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शिक्षक और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बचपन में दी गई जानकारी और संस्कार जीवनभर याद रहते हैं। इसलिए सभी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण को गंभीरता से लेते हुए बच्चों तक सही सुरक्षा जानकारी पहुंचानी चाहिए।

डीसी ने नोडल शिक्षकों से प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी को आसपास के अन्य विद्यालयों के शिक्षकों के साथ साझा करने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों में सुरक्षा कार्यक्रम के क्रियान्वयन की जांच के लिए औचक निरीक्षण भी किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि जिले में प्रत्येक शुक्रवार सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता दिवस मनाया जाता है।

एसएसडीएमए के निदेशक राजीव रोका ने ‘फ्राइडे सेफ्टी फाइव’, पांच सुरक्षा संकल्पों और सुरक्षा उपायों को दैनिक जीवन में शामिल करने के महत्व पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि यह पहल राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थानों में 18 सितंबर 2026 को आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस के अवसर पर औपचारिक रूप से शुरू की जाएगी। वहीं, उप निदेशक केशव कोइराला ने किंडरगार्टन, प्राथमिक, उच्च और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में कार्यक्रम लागू करने की रणनीति बताई। उन्होंने कहा कि बच्चों में प्रत्येक शुक्रवार सुरक्षा संबंधी आदत विकसित करना कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य है।

कोइराला ने बताया कि जिले में ऐसी तीन हिमनद झीलें हैं, जिनमें पानी के अतिप्रवाह का खतरा माना जाता है। ऐसे में जिले में आपदा तैयारी और सामुदायिक जागरूकता की आवश्यकता और अधिक बढ़ जाती है। वहीं, उप निदेशक अदा लॉरेंस ने भी अग्नि सुरक्षा, आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली से बचाव के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने आग लगने की स्थिति में अपनाई जाने वाली ‘स्टॉप, ड्रॉप एंड रोल’ तकनीक समझाई। साथ ही हिमपात और हिमस्खलन के दौरान सुरक्षा उपायों तथा राष्ट्रीय आपातकालीन नंबर 112 के बारे में भी बताया।

कार्यक्रम को उप निदेशक केसांग नीमा लेप्चा और मानव संसाधन विशेषज्ञ कुंजांग नामग्याल ने भी संबोधित किया। इस दौरान, संसाधन व्यक्ति मोहन भट्टराई ने अग्नि रोकथाम और अग्नि सुरक्षा प्रबंधन पर जानकारी देते हुए कहा कि आपातकालीन निकास मार्गों को कभी भी अवरुद्ध नहीं करना चाहिए। उन्होंने आग लगने की स्थिति में अपनाए जाने वाले रेस्क्यू, अलार्म, कंटेन और एक्सटिंग्विश (रेस) सिद्धांत को समझाया। उन्होंने अग्निशामक यंत्र चलाने की ‘पास’ तकनीक का भी प्रदर्शन किया, जिसमें पिन खींचना, आग के निचले हिस्से पर निशाना लगाना, हैंडल दबाना और अग्निशामक सामग्री को दाएं-बाएं फैलाना शामिल है।

कार्यक्रम में जिले के सभी सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों और एक निजी विद्यालय के कुल 19 नोडल शिक्षकों के साथ 162 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने अपने-अपने संस्थानों में ‘फ्राइडे सेफ्टी फाइव’ पहल को सक्रिय रूप से लागू करने और बच्चों की शिक्षा में आपदा जोखिम न्यूनीकरण, तैयारी एवं सुरक्षा जागरूकता को नियमित रूप से शामिल करने की सामूहिक शपथ ली। कार्यक्रम में एसएसडीएमए निदेशक राजीव रोका, गेजिंग के उप निदेशक सह सीडीपीओ एचबी शंकर, उप शिक्षा निदेशक दिनेश प्रधान, जिला कार्यक्रम अधिकारी गणेश राई, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा के अधिकारी एवं अन्य उपस्थित थे।

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