गंगटोक : पूर्वोत्तर भारत में उद्यमिता, नवाचार और निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सिक्किम में शनिवार को चार प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रमों का दो दिवसीय आयोजन शुरू हुआ। रंगपो के माजिटार स्थित एआईसी-एसएमयू टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेशन फाउंडेशन में आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर के निवेशक, उद्यमी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, नीति निर्माता और विभिन्न सरकारी संस्थानों के अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं।
26 और 27 सितंबर को आयोजित इन कार्यक्रमों में द्वितीय हिमालयन इन्वेस्टर्स मीट (एचआईएम-26), द्वितीय नॉर्थ ईस्ट एंटरप्रेन्योर्स डायलॉग (नीड-26), नीति आयोग का फ्रंटियर रीजन कार्यक्रम और चौथा एंटरप्रेन्योर्स मीट-2026 शामिल हैं। इनका मुख्य उद्देश्य पूर्वोत्तर के आठ राज्यों में उद्यमिता को मजबूत करने के साथ निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
शनिवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए एआईसी-एसएमयूटीबीआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के राष्ट्रीय स्टार्टअप सलाहकार परिषद के सदस्य प्रो (डॉ) तेज चिंगथम ने बताया कि चारों कार्यक्रमों को एक साथ आयोजित करने का उद्देश्य निवेश, उद्यमिता, उद्योग और सरकारी नीतियों को एक साझा मंच पर लाना है। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में प्रतिभा और व्यावसायिक संभावनाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि यहां के उद्यमियों को पूंजी, बाजार, तकनीक और उद्योग जगत से सीधे जुड़ने का अवसर मिले। यह आयोजन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
हिमालयन इन्वेस्टर्स मीट के माध्यम से निवेशकों, उद्यम पूंजी कोषों, पारिवारिक निवेश संस्थानों और उभरते उद्यमों के बीच साझेदारी के अवसर तलाशे जा रहे हैं। वहीं, नॉर्थ ईस्ट एंटरप्रेन्योर्स डायलॉग के तहत आठों पूर्वोत्तर राज्यों के उद्यमी, सरकारी प्रतिनिधि और संबंधित संस्थाएं क्षेत्र में उद्यमिता के विकास तथा व्यवसाय विस्तार की संभावनाओं पर विचार-विमर्श कर रही हैं।
नीति आयोग के फ्रंटियर रीजन कार्यक्रम में पूर्वोत्तर के सीमावर्ती क्षेत्रों की विकास संबंधी प्राथमिकताओं, चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा की जा रही है। इसके अलावा चौथे एंटरप्रेन्योर्स मीट के माध्यम से नए उद्यमों को अपने नवाचार प्रदर्शित करने और निवेशकों तथा उद्योग जगत से संपर्क स्थापित करने का अवसर मिल रहा है।
आयोजन में नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड, आईबीएम, जोहो और बॉश जैसी प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ विभिन्न निवेश संस्थानों और उद्योग संगठनों की भागीदारी है। इस दौरान प्रौद्योगिकी, पर्यटन, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, स्वास्थ्य सेवा, हस्तशिल्प, हथकरघा, परिवहन, विनिर्माण, डिजिटल सेवाओं और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं को सामने रखा जा रहा है।
प्रो. चिंगथम ने कहा कि लक्ष्य केवल नए उद्यम स्थापित करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें पूर्वोत्तर के उद्यमियों को निवेश, बाजार और तकनीकी सहयोग मिल सके। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के साथ क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।
नीति आयोग के अटल नवाचार मिशन के सहयोग से संचालित एआईसी-एसएमयूटीबीआई पूर्वोत्तर में नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए कार्य कर रहा है। यह संस्थान नए उद्यमियों को मार्गदर्शन, प्रशिक्षण, निवेश और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ने में सहयोग प्रदान करता है।
आयोजकों के अनुसार, चारों कार्यक्रमों के माध्यम से पूर्वोत्तर के राज्यों के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने और क्षेत्र की व्यावसायिक संभावनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। दो दिवसीय आयोजन का समापन रविवार को माजिटार स्थित एआईसी-एसएमयूटीबीआई परिसर में होगा।
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