सिक्किम-दार्जिलिंग का विलय असंभव : मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग

राजनीतिक लाभ के लिए भ्रामक प्रचार कर रहा विपक्ष

गंगटोक : सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग (गोले) ने सिक्किम और दार्जिलिंग के विलय की किसी भी संभावना को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने इसे असंभव विचार बताते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी दल राजनीतिक लाभ के लिए भ्रामक प्रचार कर लोगों में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं।

गंगटोक के मनन केंद्र में आयोजित राज्यस्तरीय इंद्रजात्रा समारोह 2026 को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सिक्किम की अपनी विशिष्ट पहचान और संवैधानिक सुरक्षा है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 371एफ सिक्किम के लिए सुरक्षा कवच है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार किसी भी परिस्थिति में सिक्किम की भूमि और पहचान से समझौता नहीं करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा, सिक्किम और दार्जिलिंग के विलय का विचार असंभव है। सिक्किम को भारत में विशेष दर्जा प्राप्त है और अनुच्छेद 371एफ उसकी संवैधानिक ढाल है। हम अपनी एक इंच जमीन भी किसी को लेने नहीं देंगे।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक समूह विलय का मुद्दा उठाकर सिक्किम और दार्जिलिंग के बीच वर्षों से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण एवं भाईचारे के संबंधों को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि हाल के दिनों में सिक्किम और दार्जिलिंग के संभावित विलय को लेकर राजनीतिक चर्चाएं फिर तेज हुई हैं। यह विवाद सिक्किम के मुख्य आर्थिक सलाहकार एवं शिक्षाविद् प्रोफेसर महेंद्र पी. लामा का उत्तर बंगाल के लिए अलग राज्य अथवा पड़ोसी राज्यों के सटे हुए क्षेत्रों को मिलाकर नया राज्य बनाने संबंधी प्रस्ताव से नाम जुड़ने के बाद सामने आया है।

Prem Singh Tamang (Golay) ने कहा कि सिक्किम और दार्जिलिंग के बीच दोस्ताना संबंध हैं और उन्होंने विपक्षी समूहों पर झूठी बातें फैलाकर इन संबंधों को खराब करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। हाल ही में विलय से जुड़ी चर्चाओं के पीछे किन खास समूहों का हाथ है, इस पर विस्तार से बात किए बिना, गोले ने इसे सिक्किम के संवैधानिक संरक्षण से जुड़े प्रोपेगैंडा के एक बड़े पैटर्न से जोड़ा।

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2023 में सिक्किम के पुराने निवासियों को आयकर छूट देने संबंधी सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भी अनुच्छेद 371एफ के कमजोर होने की अफवाहें फैलाई गई थीं। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 371एफ आज भी पूरी तरह सुरक्षित है और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। सिक्किम सब्जेक्ट तथा अधिवास प्रमाणपत्र धारकों के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।

साथ ही, सरकारी नियुक्तियों का उल्लेख करते हुए गोले ने कहा कि नियमित सरकारी पदों के लिए सिक्किम सब्जेक्ट अथवा अधिवास प्रमाणपत्र धारक ही पात्र हैं। आवश्यकता पड़ने पर बाहरी लोगों को अनुबंध के आधार पर नियुक्त किया जा सकता है, लेकिन अनुबंध पर नियुक्ति का अर्थ नियमित सरकारी सेवा नहीं है।

मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकार की ‘एक परिवार, एक नौकरी’ योजना के तहत नियुक्त कर्मचारियों के नियमितीकरण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने वर्ष 2019 से पहले योजना के अंतर्गत नियुक्त कर्मचारियों को नियमित करने का चुनावी वादा पूरा किया है।

मुख्यमंत्री गोले के अनुसार, सरकार ने कानूनी चुनौतियों के बावजूद इन कर्मचारियों का अदालत में पक्ष रखा, क्योंकि इनमें बड़ी संख्या आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लोगों की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोधियों ने करीब 28 हजार कर्मचारियों के नियमितीकरण और उनके वेतन के लिए धन की व्यवस्था को लेकर भी भ्रम फैलाने का प्रयास किया। सरकारी अधिसूचना के शब्दों को लेकर सवाल उठाए गए, जिनका वह पहले ही रंगपो में जवाब दे चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे किसी भी राजनीतिक प्रचार पर विश्वास करने से पहले तथ्यों की जांच करें। उन्होंने कहा कि सिक्किम की संवैधानिक सुरक्षा, पहचान और जनता के अधिकारों की रक्षा करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।

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