गंगटोक : सिटीजन एक्शन पार्टी-सिक्किम (सीएपी) की सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी कल्याण परिषद ने सिक्किम पुलिस के पूर्व महानिरीक्षक एवं सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी प्रवीण गुरुंग के साथ कथित दुर्व्यवहार की कड़ी निंदा की है। परिषद ने कहा कि सार्वजनिक समस्याओं को उठाने वाले किसी भी नागरिक को डराने-धमकाने या सार्वजनिक रूप से अपमानित करने की घटनाएं चिंताजनक हैं।
शनिवार को जारी बयान में परिषद ने बताया कि प्रवीण गुरुंग ने हाल ही में अपने व्यक्तिगत फेसबुक खाते पर एक वीडियो साझा कर गंगटोक के समीप आदमपूल-रेशिथांग सड़क की बदहाल स्थिति को उजागर किया था। परिषद के अनुसार, यह मुद्दा व्यापक जनहित से जुड़ा था और इसका उद्देश्य प्रशासन का ध्यान सडक़ की खराब स्थिति की ओर आकर्षित करना था।
परिषद ने 25 सितंबर को मनन केंद्र में मुख्यमंत्री के संबोधन के दौरान गुरुंग के संबंध में कथित तौर पर की गई टिप्पणियों और उनके खिलाफ संभावित कार्रवाई की बात पर भी चिंता व्यक्त की। पार्टी का कहना है कि किसी नागरिक की सार्वजनिक टिप्पणी से असहमति उसके अपमान या उसे डराने-धमकाने का आधार नहीं बन सकती।
परिषद ने 26 सितंबर को अपर बुर्तुक के विधायक और प्रवीण गुरुंग के बीच कथित टकराव का मुद्दा भी उठाया। पार्टी के अनुसार, भूमि अतिक्रमण से जुड़े आरोपों को लेकर विधायक द्वारा गुरुंग का सामना किए जाने की खबरें सामने आई हैं। सोशल मीडिया पर प्रसारित दृश्यों में दोनों के बीच तीखी बहस होने तथा विधायक के साथ कुछ युवाओं की मौजूदगी का दावा किया गया है।
सीएपी ने कहा कि यदि गुरुंग के खिलाफ भूमि अतिक्रमण का कोई आरोप है, तो उसकी जांच संबंधित सरकारी विभाग और सक्षम प्राधिकारी को कानूनी प्रक्रिया के तहत करनी चाहिए। इसके लिए जमीन के रिकॉर्ड, सत्यापन, जांच और कानून लागू करने के लिए सक्षम सरकारी विभाग और वैधानिक प्राधिकरण मौजूद हैं। किसी भी जनप्रतिनिधि को स्वयं जांच एजेंसी या न्यायिक प्राधिकारी की भूमिका नहीं निभानी चाहिए।
परिषद ने स्पष्ट किया कि कोई भी नागरिक कानून से ऊपर नहीं है, लेकिन प्रत्येक नागरिक को कानून के तहत समान सुरक्षा प्राप्त है। आरोपों का निपटारा सार्वजनिक टकराव या राजनीतिक दबाव के बजाय निष्पक्ष जांच के माध्यम से होना चाहिए। परिषद ने कहा कि प्रवीण गुरुंग ने भारतीय पुलिस सेवा में रहते हुए राज्य की सेवा की है और महानिरीक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। ऐसे वरिष्ठ नागरिक की गरिमा और सम्मान बनाए रखना आवश्यक है। पार्टी ने सवाल उठाया कि यदि एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को सार्वजनिक समस्या उठाने पर कथित रूप से इस तरह की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है, तो आम नागरिक अपनी समस्याएं उठाने में कितना सुरक्षित महसूस करेगा।
परिषद ने गुरुंग की व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित करने, उनके खिलाफ किसी भी आरोप की जांच सक्षम प्राधिकारी से कराने तथा 26 सितंबर की कथित घटना की परिस्थितियों की जांच करने की मांग की है। साथ ही निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से संयम बरतने और नागरिकों के साथ सार्वजनिक टकराव से बचने का आग्रह किया है। सीएपी ने कहा कि सड़क, बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सेवाओं की कमियों को उजागर करना नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार है। ऐसी शिकायतों पर प्रशासन को समस्या के समाधान की दिशा में कदम उठाना चाहिए। पार्टी ने प्रवीण गुरुंग के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर प्रत्येक नागरिक की गरिमा, कानून का शासन और निष्पक्ष प्रशासनिक प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
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