प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियमों पर जागरुकता कार्यक्रम आयोजित

गेजिंग : सिक्किम पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (एसपीसीबी) द्वारा ग्रामीण विकास विभाग (आडीडी) तथा गेजिंग जीडीजेडपी के समन्वय से प्लास्टिक कचरे के वर्गीकरण एवं आकलन तथा प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियमों पर आधारित एक जागरुकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन गेजिंग जिला स्थित एडीसी (विकास) कार्यालय में किया गया।

कार्यक्रम में एडीसी (विकास), जिला पंचायत अधिकारी (जिला पंचायत), पंचायत अध्यक्ष, पंचायत सदस्य, ब्लॉक विकास अधिकारी-गेजिंग, सहायक निदेशक, पंचायत निरीक्षक, एसवीएम-जी के ब्लॉक समन्वयक, पंचायत विकास सहायक, सफाईकर्मी तथा संसाधन व्यक्ति के रूप में राज्य आईएमआईएस एवं एम एंड ई विशेषज्ञ पूर्ण बहादुर राई और एसवीएम-जी आरडीडी के एमआईएस विशेषज्ञ राकेश बिष्ट उपस्थित थे। इसके अलावा एसपीसीबी की ओर से फील्ड असिस्टेंट रिषभ शर्मा तथा जूनियर इंजीनियर प्रवेश छेत्री ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत एडीसी (विकास) के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्लास्टिक कचरे के सही आकलन, पृथक्करण और वैज्ञानिक प्रबंधन के प्रति जागरुकता फैलाना है। उन्होंने स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण बनाए रखने के लिए जनभागीदारी को आवश्यक बताते हुए नागरिकों से जिम्मेदारीपूर्वक कचरा निपटान की आदत अपनाने की अपील की। साथ ही प्लास्टिक सामग्री के उपयोग और उसके निस्तारण में सावधानी बरतने पर जोर दिया।

तकनीकी सत्र के दौरान जूनियर इंजीनियर प्रवेश छेत्री और फील्ड असिस्टेंट रिषभ शर्मा ने प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित कानूनी प्रावधानों और जागरूकता विषयों पर विस्तृत जानकारी दी।उन्होंने प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत स्थानीय निकायों, संस्थानों और समुदाय की जिम्मेदारियों के बारे में बताया। साथ ही कचरे के पृथक्करण, व्यवस्थित संग्रहण, पुनर्चक्रण प्रक्रिया और सुरक्षित निस्तारण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के समापन पर सिंगल यूज प्लास्टिक के वर्गीकरण एवं आकलन पर व्यावहारिक प्रदर्शन आयोजित किया गया। इसमें प्रतिभागियों को सिंगल यूज प्लास्टिक कचरे की पहचान, वर्गीकरण और आकलन से संबंधित फील्ड आधारित प्रशिक्षण दिया गया। प्रतिभागियों को कचरा पृथक्करण, आकलन प्रक्रिया तथा डेटा संग्रहण की तकनीकों की जानकारी भी प्रदान की गई। इसके अलावा सिंगल-यूज प्लास्टिक से होने वाले पर्यावरणीय दुष्प्रभावों और प्रभावी निगरानी एवं सुरक्षित निस्तारण प्रणाली के महत्व के बारे में भी जागरूक किया गया।

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