छात्रवृत्ति केवल आर्थिक सहायता नहीं, भविष्य पर विश्वास है : राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर

जनजातीय समाज के गौरव और भविष्य का उत्सव है 'जनजातीय गौरव उत्सव'

गंगटोक : सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने आज लोकभवन में ‘बिरसा लिव इन न्यू भारत वीक’ के अंतर्गत आयोजित ‘जनजातीय गौरव उत्सव 2026’ के विशेष संवाद सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। इस अवसर पर समाज कल्याण विभाग के माननीय मंत्री साम्दुप लेपचा की विशेष उपस्थिती रही।

सिक्किम सरकार के सामाजिक कल्याण विभाग के छात्रवृत्ति अनुभाग द्वारा भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देशानुसार आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जनजाति (एसटी) के पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति लाभार्थियों के साथ माननीय राज्यपाल का सीधा संवाद स्थापित करना था। इस संवाद सत्र का उद्देश्य विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करना और उन्हें ‘विकसित भारत’ के निर्माण में योगदान देने के लिए उत्साहित करना रहा।

कार्यक्रम में लगभग 60 जनजातीय विद्यार्थी तथा छह जिलों के जिला कल्याण अधिकारी और जिला नोडल अधिकारी उपस्थित रहे।

इस दौरान सामाजिक कल्याण विभाग की सचिव श्रीमती सारिका प्रधान ने एससी, एसटी, ओबीसी और ईबीसी विद्यार्थियों के लिए संचालित प्री-मैट्रिक एवं पोस्ट-मैट्रिक केंद्रीय प्रायोजित छात्रवृत्ति योजनाओं पर विस्तार से जानकारी दी। विभाग ने बताया कि राज्य में एसटी विद्यार्थियों के लिए प्री-मैट्रिक (कक्षा 9-10) और पोस्ट-मैट्रिक (कक्षा 12 से आगे) छात्रवृत्ति योजनाएं लागू हैं, जिन्हें केंद्र और राज्य सरकार 90:10 अनुपात में वित्तपोषित करती हैं।

संवाद सत्र में राज्यपाल ने छात्र-छात्राओं से सीधे संवाद किया और उनकी जिज्ञासाओं का संज्ञान लिया। विद्यार्थियों ने समय पर छात्रवृत्ति वितरण, ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया, आय सीमा बढ़ाने और छात्रवृत्ति राशि में वृद्धि जैसी विषय साझा किए। साथ ही उन्होंने अपने अनुभव भी बताए। अपनी प्रतिक्रिया में राज्यपाल ने विभाग के अधिकारियों से अनुरोध किया कि विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति संबंधी तकनीकी कारणों का पता करते हुए उन्हें चिन्हित कर समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि कोई भी बच्चा अपने अधिकार और अवसर से वंचित न रहे।

राज्यपाल ने अपने सम्बोधन में  भगवान बिरसा मुंडा के योगदान को स्मरण करते हुए युवाओं को ‘नए भारत’ के निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया और कहा कि शिक्षा समुदायों के सशक्तिकरण और विकास का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने इस जागरुकता कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे बड़े स्तर पर आयोजित करने पर बल दिया।

राज्यपाल ने कहा कि ‘जनजातीय गरिमा उत्सव’ केवल एक आयोजन नहीं है, बल्कि यह जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास, उनके संघर्ष, उनकी संस्कृति और उनके उज्ज्वल भविष्य का उत्सव है। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत तभी पूर्ण विकसित होगा जब समाज का हर वर्ग सशक्त और समृद्ध होगा। प्रधानमंत्री जी के सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास  मंत्र को आत्मसात करते हुए आदिवासी समाज तक विकास की मुख्यधारा पहुंच रही है।

राज्यपाल ने अपने संबोधन में यह भी उल्लेख किया कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के इतिहास में जनजातीय समाज के योगदान को सर्वोच्च सम्मान दिया। उन्होंने इतिहास के उन ‘अनसुने नायकों’ को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का ऐतिहासिक कार्य किया और प्रत्येक वर्ष 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाने की ऐतिहासिक शुरुआत की। यह निर्णय जनजातीय समाज के लिए एक पुनर्जागरण साबित हुआ।

राज्यपाल ने भगवान बिरसा मुंडा के बलिदानों और समाज सुधार कार्यों को उजागर करते हुए कहा कि उनके संघर्ष ने उन्हें जनजातीय समाज में भगवान का दर्जा दिलाया। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे बिरसा मुंडा के आदर्शों- आत्मसम्मान, साहस, शिक्षा और समाज सेवा  को अपने जीवन में उतारें और नए भारत के निर्माण में योगदान दें।

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाएं केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि सरकार का आपके सामर्थ्य और भविष्य पर विश्वास हैं। राज्यपाल महोदय ने यह भी कहा कि विकास का अर्थ केवल आधुनिकता नहीं, बल्कि अपनी जड़ों और विरासत को साथ लेकर आगे बढ़ना है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी संस्कृति पर गर्व करें, आधुनिक शिक्षा और तकनीक को अपनाएं और भगवान बिरसा मुंडा के आदर्शों को अपने जीवन में उतारें।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न जिलों को लैपटॉप वितरित किए गए और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिलों को सम्मानित किया गया। सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला जिला गेजिंग  घोषित किया गया, सबसे अधिक छात्रवृत्ति आवेदन प्राप्त करने वाला जिला नामची रहा और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली जिला नोडल अधिकारी, नामची को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव सह आयुक्त जितेंद्र सिंह राजे, सामाजिक कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षकगण और बड़ी संख्या में छात्रवृत्ति लाभार्थी उपस्थित रहे।

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