50 साल का विकास, लेकिन गेजिंग-लेगशेप सड़क अब भी बदहाल

सिक्किम के स्वर्ण जयंती उत्सव के बीच स्थानीय लोगों ने उठाए बुनियादी सुविधाओं पर सवाल

गेजिंग (पार्वती शर्मा)। भारत के 22वें राज्य के तौर पर सिक्किम ने अपना ऐतिहासिक 50वां राज्य दिवस बड़े शानदार तरीके से मनाया है। दावा किया गया है कि इस अवधि में राज्य ने पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचा समेत विभिन्न क्षेत्रों में काफी तरक्की की है। राजधानी गंगटोक से लेकर गांवों तक, बदलाव की कई तस्वीरें देखी जा सकती हैं। लेकिन विकास के इन चमकदार नारों के बीच, पश्चिम सिक्किम के गेजिंग जिलान्तर्गत लेगशेप से गेजिंग तक सड़क की हालत अभी भी पुराने खस्ताहाल में ही है। इसके कारण, स्थानीय निवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

सिक्किम राज्य बनने के पांच दशक बाद भी इस सड़क़ का आधुनिक रूप न ले पाना स्थानीय लोगों के लिए दुख और निराशा की बात बन गई है। स्थानीय लोग कहते हैं, राज्य ने 50 साल तरक्की कर ली है, लेकिन हमारी सड़क अभी भी राजा के समय की घोड़ों के मार्ग जैसी ही है। वास्तव में, सडक़ की मौजूद हालत देखकर यह बात गलत नहीं लगती। कुछ जगहों पर सड़क़ पतली, खड़ी और खतरनाक है, तो कुछ जगहों पर बारिश के मौसम में कीचड़ और भूस्खलन से आवाजाही रुक जाती है। ऐसी स्थिति में, इस सड़क पर यातायात करने वाले, खासकर रोजाना काम पर, स्कूल, अस्पताल या बाजार जाने वाले स्थानीय लोग सालों से इस समस्या से जूझ रहे हैं।

इस सड़क की हालत ऐसी है कि जब कोई बड़ा ट्रक आता है, तो छोटी गाडिय़ों को या तो लंबा इंतजार करना पड़ता है या फिर बहुत जोखिम उठाकर संकरी जगहों से गुजरना पड़ता है। कुछ मोड़ इतने संकरे हैं कि एक ही समय में दो गाडिय़ां नहीं निकल सकतीं। ऐसे में यात्री डर के साए में सफर करने को मजबूर हैं।

दूसरी ओर, पेलिंग जैसे दुनिया भर में मशहूर पर्यटन क्षेत्र के इस सड़क़ से जुड़ा होने के बावजूद, इसकी हालत नहीं सुधरना विडंबना ही है। बार-बार शिकायतें उठती रही हैं कि पेलिंग पहुंचने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों को प्राकृतिक सुंदरता के आगे सडक़ की परेशानी झेलनी पड़ती है। यह अजीब बात है कि राज्य सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों खर्च कर रही है, फिर भी वहां जाने वाली मुख्य सडक़ की यह हालत बनी हुई है।

इस संबंध में पर्यटन व्यवसाय से जुड़े होटल मालिक, टैक्सी ड्राइवर और स्थानीय व्यापारी भी कहते हैं कि सडक़ नहीं बनने से आर्थिक असर पड़ा है। उनका मानना है कि बेहतर सडक़ें बनने से पर्यटक की संख्या बढ़ेगी, सफर आसान होगा और व्यवसाय पर अच्छा असर पड़ेगा। लेकिन अभी के हालात ने बहुतों को निराश किया है।

और तो और, बारिश का मौसम शुरू होते ही यह समस्या और गंभीर हो जाती है। भूस्खलन, सड़क़ टूटने और कीचड़ की वजह से ट्रैफिक में रुकावट आम बात हो जाती है। इमरजेंसी में मरीजों को ले जा रही एम्बुलेंस से लेकर विद्यार्थियों को ले जा रही गाडिय़ों तक, उन्हें जोखिम भरी यात्रा करनी पड़ती है। कुछ जगहों पर सडक़ें इतनी कमजोर हैं कि सामान्य बारिश में भी यात्रा करने में डर लगता है। इनमें, रानीबन, खेपा और बादरे खेलसा जैसी जगहें शामिल हैं जहां यह सडक़ खास तौर पर कमजोर और खतरनाक हैं।

हालांकि, स्थानीय जन प्रतिनिधियों ने समय-समय पर सड़क को बेहतर बनाने का आश्वासन दिया है, लेकिन वास्तव में कोई बदलाव नहीं दिखा है। निरीक्षण, घोषणाओं और प्लान की खबरों के बावजूद, सडक़ों में पक्का सुधार अभी तक नहीं दिखा है।

बहरहाल, लोगों का कहना है कि विकास का मतलब सिर्फ इमारतें बनाना नहीं, बल्कि सड़क़, पानी, बिजली और स्वास्थ्य सेवा आदि की सुविधा भी है। दूर-दराज़ के इलाकों के लोगों को सुरक्षित सफर करने का अधिकार पक्का करना भी विकास का एक जरूरी हिस्सा है। अगर राज्य सच में ‘विकसित सिक्किम’ का सपना देखता है, तो गेजिंग-लेगशेप सडक़ जैसी बुनियादी समस्याओं पर तुरंत ध्यान देना जरूरी है।

No Comments:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

National News

Politics