गेजिंग : वित्त वर्ष 2026-27 की 30 जून, 2026 को समाप्त पहली तिमाही के लिए आज यहां जिला पंचायत सभागार में जिला स्तरीय परामर्शदात्री समिति (डीएलसीसी) सह जिला स्तरीय समीक्षा समिति (डीएलआरसी) की बैठक हुई।
जिला कलेक्टर सह डीएलसीसी चेयरमैन तेनजिंग डी. डेन्जोंग्पा (Tenzing D Denzongpa) की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में आरिथांग-गेरेथांग क्षेत्रीय जिला सदस्य यदु प्रसाद छेत्री, गेजिंग बीडीओ गराप भूटिया, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के लीड डिस्ट्रिक्ट ऑफिसर अनुज रैना, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर नितेश कुमार, नाबार्ड एजीएम पुक्रमबम बोइचा मेइतेई, विभिन्न विभागीय प्रतिनिधि और जिले में कार्यरत बैंकों के अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के दौरान बैंकों और वित्तीय संस्थानों के प्रदर्शन की व्यापक समीक्षा की गई। इसमें प्राथमिकता क्षेत्र ऋण, केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित योजनाओं, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तथा वित्तीय समावेशन से संबंधित गतिविधियों की प्रगति पर चर्चा हुई।
समीक्षा के दौरान बताया गया कि पहली तिमाही के अंत में जिले का क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात 58.92 प्रतिशत रहा। वहीं वार्षिक ऋण योजना के तहत प्राथमिकता क्षेत्र में कुल उपलब्धि 19.65 प्रतिशत दर्ज की गई। वहीं, क्षेत्रवार प्रदर्शन की समीक्षा में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र में 15.84 प्रतिशत, एमएसएमई क्षेत्र में 34.50 प्रतिशत, अन्य प्राथमिकता क्षेत्र में 41.45 प्रतिशत तथा गैर-प्राथमिकता क्षेत्र में 35.84 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की गई।
बैठक में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों की क्रेडिट लिंकेज, किसान क्रेडिट कार्ड, आवास ऋण, शिक्षा ऋण सहित विभिन्न सरकारी प्रायोजित योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इसके अलावा प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री जनधन योजना और अटल पेंशन योजना जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी चर्चा हुई।
इस अवसर पर जिला कलेक्टर ने क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात की प्रगति की समीक्षा की और कहा कि पिछली समीक्षा के दौरान यह अनुपात चिंता का विषय रहा था। उन्होंने कहा कि ग्रामीण आबादी की आजीविका में सुधार तथा सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देने में बैंकों और वित्तीय संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बैंकों से राज्य और केंद्र प्रायोजित योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा आम लोगों की सुविधा और सुगम पहुंच सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने संबंधित विभागों, बैंकों, प्रखंड विकास कार्यालयों और ग्राम पंचायतों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया, ताकि लोगों को सरकारी योजनाओं, बैंकिंग सेवाओं और उपलब्ध वित्तीय अवसरों की जानकारी और लाभ आसानी से मिल सके।
साथ ही, डीसी डेन्जोंग्पा ने विशेष रूप से कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में ऋण प्रवाह बढ़ाने, वित्तीय समावेशन को मजबूत करने तथा विभिन्न योजनाओं के तहत प्राप्त आवेदनों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बैंकों को आरबीआई के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नियमित रूप से वित्तीय साक्षरता शिविर और ब्लॉक स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठकें आयोजित करने को कहा। उन्होंने जमीनी स्तर पर बेहतर समन्वय के लिए बैंक अधिकारियों को संबंधित बीडीओ और ग्राम पंचायतों के साथ तालमेल मजबूत करने का भी निर्देश दिया। उन्होंने अगले तिमाही की डीएलसीसी-डीएलआरसी बैठक में सभी बीडीओ और ग्राम पंचायत अध्यक्षों को आमंत्रित करने का भी निर्देश दिया, ताकि जमीनी स्तर की समस्याओं और सुझावों को सीधे समीक्षा में शामिल किया जा सके।
वहीं, बैठक के दौरान योक्सम-ताशीडिंग क्षेत्र में बैंकिंग सुविधा स्थापित करने के लंबे समय से लंबित मुद्दे पर भी चर्चा हुई। जिला कलेक्टर ने कहा कि पूर्व में अनुरोध किए जाने के बावजूद क्षेत्र में आवश्यक बैंकिंग सुविधा स्थापित नहीं हो सकी है। उन्होंने स्थानीय आबादी की जरूरतों को देखते हुए बैंकिंग संस्थानों से इस दिशा में व्यवहारिक विकल्प तलाशने और जल्द आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया।
इसके अलावा एमएसएमई क्षेत्र के प्रदर्शन की समीक्षा करते हुए जिला कलेक्टर ने बैंकों से पात्र उद्यमियों को संस्थागत ऋण उपलब्ध कराने तथा प्राप्त आवेदनों को निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार स्वीकार कर समय पर निस्तारित करने को कहा। उन्होंने कहा कि बैंकों की भूमिका केवल जमा राशि जुटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्याप्त ऋण प्रवाह सुनिश्चित कर जिले की आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करना भी उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम प्रदर्शन करने वाले बैंकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर सुधारात्मक कदम उठाने और प्रदर्शन में सुधार लाने के निर्देश दिए। साथ ही चेतावनी दी कि विभिन्न योजनाओं और ऋण लक्ष्यों के क्रियान्वयन में लगातार कमियां रहने पर संबंधित मामलों को आवश्यक हस्तक्षेप के लिए क्षेत्रीय कार्यालयों के संज्ञान में लाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर मुख्य सचिव के स्तर पर भी मामला उठाया जा सकता है।
जिला कलेक्टर ने स्थानीय कारीगरों, शिल्पकारों और छोटे उद्यमियों को उपयुक्त ऋण एवं वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया। बैठक में गेजिंग डीआईसी को पीएमईजीपी के तहत संबंधित बैंकों को भेजे गए आवेदनों की प्रतियां जिला कलेक्टर कार्यालय को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य यदु प्रसाद छेत्री और बीडीओ ने भी बैंकिंग सेवाओं तथा सरकारी प्रायोजित योजनाओं का लाभ लेने में आवेदकों को जमीनी स्तर पर आ रही समस्याओं और चुनौतियों से अवगत कराया। बैठक में उठाए गए सवालों का जवाब आरबीआई के लीड डिस्ट्रिक्ट ऑफिसर और एसबीआई के लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर ने दिया।
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