सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की सोनम की जमानत, तीन सप्ताह में पुलिस के सामने सरेंडर करने का निर्देश

नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने हनीमून के दौरान पति की हत्या की आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत रद्द कर दी है। कोर्ट ने सोनम रघुवंशी को तीन सप्ताह के भीतर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट और ट्रायल कोर्ट ने गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी देने में कथित कमी के आधार पर जमानत देते समय गलती की थी।

हालांकि, जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने यह भी कहा कि अगर छह महीने के भीतर मुकदमे की सुनवाई पूरी नहीं होती है तो सोनम नई जमानत याचिका दाखिल करने के लिए स्वतंत्र होंगी।

मेघालय सरकार की ओर से दायर अपील को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी देना जरूरी है। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं था कि गिरफ्तारी के कारण बिल्कुल भी नहीं बताए गए। कोर्ट ने कहा कि सोनम को 9 जून 2025 को गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले पति की मौत के बाद वह कथित तौर पर लापता थीं।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, शादी के बाद सोनम राजा रघुवंशी के साथ मेघालय गई थीं। वहां कथित तौर पर उनकी हत्या कर दी गई और तीन अन्य लोगों की मदद से उनका शव एक गहरी खाई में फेंक दिया गया। आरोप है कि इन तीनों लोगों को सोनम ने ही हत्या के लिए कथित तौर पर किराये पर रखा था।

विवाद उस समय हुआ, जब गिरफ्तारी के कारणों में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) की जगह धारा 403(1) का उल्लेख किया गया।

सुप्रीम कोर्ट के पिछले मिहिर राजेश शाह मामले का हवाला देते हुए सोनम ने दलील दी थी कि उन्हें गिरफ्तारी के सही कारणों की जानकारी नहीं दी गई, इसलिए वह जमानत की हकदार हैं। ट्रायल कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार कर लिया था और हाईकोर्ट ने भी उस आदेश को बरकरार रखा था। सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी नहीं देना और दी गई जानकारी में पर्याप्त विवरण न होना, दोनों अलग-अलग बातें हैं।

मध्य प्रदेश के इंदौर की रहने वाली सोनम को जून, 2025 में अपने व्यवसायी पति राजा रघुवंशी की हत्या के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। यह जोड़ा पिछले साल 23 मई को मेघालय के सोहरा इलाके में छुट्टियों के दौरान लापता हो गया था। इसके बाद 2 जून, 2025 को राजा का शव एक गहरी खाई में मिला।

मामले की जांच कर रही पुलिस का आरोप है कि सोनम ने किराये के हत्यारों के साथ मिलकर पति की हत्या की साजिश रची थी। मेघालय की ट्रायल अदालत ने 27 अप्रैल, 2026 सोनम को जमानत दी थी और 29 जून, 2026 को मेघालय हाईकोर्ट ने जमानत रद्द करने की राज्य पुलिस की याचिका खारिज कर दी थी। मेघालय सरकार ने जमानत के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

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