नई दिल्ली । ईरान, इस्राइल और अमेरिका के बीच जारी युद्ध के तीन महीने बीत चुके हैं। इसका सीधा असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से पेट्रोलियम उत्पादों का संयमित उपयोग करने की अपील की है। पीएम के इस बयान पर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है। मुख्य विपक्षी दल ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह विफल रहे हैं।
हैदराबाद में आयोजित भाजपा की एक रैली में प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक संकट पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि युद्ध के कारण पेट्रोल और उर्वरकों की कीमतों में भारी उछाल आया है। पीएम ने नागरिकों से अपील की कि वे मेट्रो रेल का उपयोग करें, कार पूलिंग करें और इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर दें। उन्होंने विदेशी मुद्रा बचाने के लिए लोगों से एक साल तक सोने की खरीद और विदेश यात्रा टालने का भी सुझाव दिया।
प्रधानमंत्री ने काम करने के तरीकों में बदलाव का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कोरोना के दौरान हमने वर्क फ्रॉम होम और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सीखी थी। अब समय आ गया है कि ऊर्जा बचाने के लिए उन तरीकों को फिर से अपनाया जाए। इसके अलावा, उन्होंने खाद पर निर्भरता कम करने के लिए प्राकृतिक खेती और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की बात कही।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि युद्ध के तीन महीने बाद भी प्रधानमंत्री के पास ऊर्जा सुरक्षा को लेकर कोई रोडमैप नहीं है। वेणुगोपाल ने पीएम के सुझावों को शर्मनाक और अनैतिक करार दिया। कांग्रेस का कहना है कि सरकार अपनी विफलताओं का बोझ आम जनता पर डाल रही है। विपक्ष ने मांग की है कि सरकार विज्ञापन और राजनीति छोड़कर ईंधन के पर्याप्त भंडार सुनिश्चित करे।
कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने रणनीतिक योजना नहीं बनाई, तो देश आर्थिक तबाही की ओर बढ़ सकता है। वेणुगोपाल के अनुसार, जब सरकार की प्राथमिकता केवल चुनाव और ओछी राजनीति होती है, तो जनता को ऐसी ही किल्लत झेलनी पड़ती है।
No Comments: