नई दिल्ली । देश में अवैध रूप से रहते हुए यहां डेमोग्राफिक चेंज के तहत आबादी और सुरक्षा के सिस्टम को प्रभावित कर रहे घुसपैठियों को देश से बाहर खदेड़ने की उलटी गिनती शुरू हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की है कि इसके लिए भारत सरकार ने एक ‘हाई-लेवल कमेटी’ का गठन किया है।
जो एक साल में देश के विभिन्न राज्यों खासतौर से पाकिस्तान, बांग्लादेश और अन्य देशों से लगते देश के बॉर्डर इलाकों में घुसपैठियों की वजह से असामान्य रूप से बढ़ती आबादी, अवैध रूप से बने कलस्टर और घरों समेत अन्य साजो-सामान का सर्वे कर अपनी रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौंपेगी। ताकि पहचाने गए घुसपैठियों को देश से बाहर निकालने का काम किया जा सके।
छह सदस्यों की इस कमेटी के बारे में गृह मंत्री शाह ने बताया कि रिटायर्ड जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर इस कमिटी के चीफ होंगे। जबकि सेंसस कमिश्नर, रिटायर्ड आईएएस दुर्गा शंकर मिश्रा, रिटायर्ड आईपीएस बालाजी श्रीवास्तव के अलावा डॉक्टर शमिका रवि इसके सदस्य और गृह मंत्रालय में विदेशी विभाग के जॉइंट सेक्रेटरी इसके मेंबर सेक्रेटरी होंगे।
15 अगस्त, 2025 को लालकिले की प्राचीर से इसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। केंद्र सरकार ने देश में अवैध रूप से रहने वालों और असामान्य कारणों की वजह से उत्पन्न हो रहे जनसांख्यिकीय बदलावों की स्टडी और इनसे निपटने के उपायों पर सुझाव देने के लिए एक हाई लेवल कमिटी का गठन किया है।
देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कमेटी का कार्य देश में अवैध रूप से रहने वाले घुसपैठियों की पहचान करना, इनके द्वारा असामान्य कारणों से पूरे भारत में हो रहे डेमोग्राफिक बदलावों की जांच, धार्मिक और सामाजिक समुदायों के स्तर पर असामान्य रूप से जनसंख्या में हो रहे बदलावों के पैटर्न की एक साल के अंदर स्टडी कर इस गंभीर समस्या से निपटने के सुझाव भी देगी।
एक साल में काम पूरा ना होने पर कमेटी का कार्यकाल छह महीने तक के लिए बढ़ाया भी जा सकेगा। इसमें आबादी परिवर्तन से उत्पन्न हो रहीं चुनौतियों और सीमापार से हो रही गतिविधियों की भी स्टडी की जाएगी। पता लगाया जाएगा कि इन बदलावों के पीछे क्या मंसूबे हैं, कहीं यह कुछ लोगों और देशों की सोची-समझी साजिश तो नहीं। जो की देश में सीमावर्ती इलाकों में कहीं भोले-भाले आदिवासियों को बरगलाकर तो कहीं अन्य तरीके से उनकी जमीन पर कब्जा भी कर रहे हैं। समिति सरकार को इससे निपटने के तरीके बताते हुए सुझाव भी दे सकती है।
बीकानेर की सांचू चौकी की विजिट के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सीमापार से ड्रोन के माध्यम से नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी रोकने के लिए कठोर कदम उठाए जा रहे हैं। सीमा पार से भारत में आने वाले ड्रोन को रोकने के लिए अगले छह महीनों में बॉर्डर पर एंटी ड्रोन सिस्टम लगाने की शुरुआत कर दी जाएगी।
बता दें कि ड्रोन के माध्यम से पाकिस्तान की तरफ से देश में सबसे अधिक ड्रग्स और हथियारों की तस्करी की जाती है। साथ ही बॉर्डर पर स्मार्ट फेंसिंग भी लगाई जाएगी। उन्होंने कहा कि सीमा पार से भेजे जाने वाला ड्रोन उतरता तो हमारे देश की जमीन पर ही है। इसे कौन रिसीव करता है। इन सभी की पहचान कर उन पर सख्त से सख्त एक्शन लेने की जरूरत है।
सीमा पार से ड्रग्स, हथियार, आतंकवादियों और घुसपैठियों की घुसपैठ रोकने के लिए एक चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड भी बनाया जाएगा। इसमें बीएसएफ, आर्मी, स्थानीय राज्य प्रशासन और लोकल लोगों को साथ लेकर यह सुरक्षा ग्रिड बनाया जाएगा। ताकि सीमा की संपूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इससे समय रहते ही सीमापार से हो रही गतिविधियों की पहचान कर उसकी रोकथाम के लिए एक्शन लिया जा सकेगा। इससे सरहद पार से पैदा होने वाले खतरों के साथ ही देश के अंदर इनकी मदद करने वाले देश विरोधी तत्वों की भी पहचान होने में मदद मिलेगी। बिहार, गुजरात, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल जैसे सीमावर्ती राज्यों की सरकारों और प्रशासनों के साथ बैठकों का दौर जारी है।
शाह ने कहा कि पहले कभी सोचा जाता था कि बीएसएफ में महिलाएं क्या कर सकेंगी। लेकिन महिलाओं ने तमाम चुनौतियों का डटकर सामना किया है। महिला कर्मियों के लिए बुनियादी ढांचे का विस्तार किया जा रहा है। 2030 तक सभी महिला कर्मियों के लिए सुविधाएं सुनिश्चित कर दी जाएंगी। इसमें बीओपी के पास भी उन्हें तमाम तरह की बुनियादी सुविधाएं दे दी जाएंगी। राजस्थान में 180 सीमा चौकियों को पानी की पाइप लाइन से जोड़ा गया है।
अमित शाह ने कहा कि देश के गृह मंत्री बनने से भी पहले सालों से उनकी राजस्थान के बीकानेर में भारत-पाकिस्तान बॉर्डर की इस ऐतिहासिक सांचू चौकी को देखने की इच्छा थी। जो आज इस विजिट के दौरान पूरी हुई। 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह वही सांचू चौकी है। जहां 1965 में भारत के जांबाज जवानों ने पाकिस्तानी सेना के छक्के छुड़ाते हुए उन्हें यहां से पीठ दिखाते हुए भागने पर मजबूर कर दिया था। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बहादुरी का परिचय देने वाले तमाम जवानों की प्रशंसा भी की।
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