गंगटोक : सिक्किम में संभावित 2027 पंचायत चुनावों से पहले राज्य की राजनीति गरमाने लगी है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) राज्य में एक असहज राजनीतिक स्थिति का सामना कर रही है, जहां सत्तारूढ़ सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (SKM) और प्रमुख विपक्षी दल सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (SDF) दोनों ही भाजपा पर हमलावर नजर आ रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि राष्ट्रीय स्तर पर एसकेएम और भाजपा के बीच एनडीए गठबंधन के तहत संबंध मजबूत दिखाई देते हैं। हाल ही में अप्रैल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गंगटोक दौरे के दौरान मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग गोले और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डीआर थापा उनके साथ मौजूद थे। प्रधानमंत्री के स्वागत में बड़ी संख्या में लोग भी जुटे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री तमांग ने राज्य में विकास परियोजनाओं के लिए प्रधानमंत्री का आभार जताया था और विकसित भारत के निर्माण में सिक्किम की भूमिका को लेकर प्रतिबद्धता दोहराई थी।
प्रधानमंत्री मोदी ने सिक्किम राज्य बनने की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर राज्य में 4000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया था। इसके बावजूद राज्य की जमीनी राजनीति में भाजपा और एसकेएम के रिश्तों में दूरी साफ दिखाई देने लगी है।
सत्तारूढ़ एसकेएम की वरिष्ठ महिला नेता और अपर बुर्तुक की विधायक कला राई ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी पंचायत चुनावों में पार्टी भाजपा के साथ कोई गठबंधन नहीं करेगी। उनका यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल के नगर निकाय चुनावों में दोनों दलों के बीच समझदारी देखने को मिली थी। कला राई के बयान से साफ संकेत मिलता है कि एसकेएम पंचायत चुनाव अपने दम पर लड़ने की तैयारी में है।
दूसरी ओर, विपक्षी खेमे से पूर्व मुख्यमंत्री और एसडीएफ अध्यक्ष पवन कुमार चामलिंग ने भी भाजपा पर तीखा हमला बोला है। जोरथांग में आयोजित पार्टी के ‘क्रांति दिवस’ कार्यक्रम में चामलिंग ने लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर भाजपा सत्ता में आती है, तो सिक्किम को “दूसरा मणिपुर” बनने से बचाना होगा। उन्होंने मतदाताओं से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि सिक्किम हमेशा शांति, सांप्रदायिक सद्भाव और विभिन्न समुदायों की एकता के लिए जाना जाता रहा है और इन मूल्यों की रक्षा हर हाल में की जानी चाहिए।
हालांकि, चामलिंग के बयान पर सिक्किम प्रदेश भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने 23 जून को जारी प्रेस विज्ञप्ति में उनके बयान को “गैर-जिम्मेदाराना, भ्रामक और राज्य के सर्वोच्च पद पर दो दशक से अधिक समय तक रहे नेता के लिए अनुचित” बताया। प्रदेश भाजपा ने कहा कि मणिपुर के लोगों की चुनौतियों को राजनीतिक बयानबाजी के लिए इस्तेमाल करना दुर्भाग्यपूर्ण और असंवेदनशील है।
साथ ही, भाजपा ने चामलिंग को चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे इतना गंभीर आरोप लगा रहे हैं, तो उन्हें सिक्किम की जनता के सामने तथ्य रखने चाहिए। पार्टी ने कहा कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े नेताओं की जिम्मेदारी है कि वे प्रमाण और जवाबदेही के साथ बात करें, न कि डर और भ्रम फैलाने वाली बयानबाजी करें।
प्रदेश भाजपा ने यह भी कहा कि पार्टी ने हमेशा सिक्किम की विशिष्ट पहचान, परंपरा, संस्कृति और अनुच्छेद 371एफ के तहत मिले संवैधानिक सुरक्षा प्रावधानों का सम्मान किया है।
पार्टी ने चामलिंग पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में पार्टी के बढ़ते जनसंपर्क और विस्तार से कुछ नेता असहज महसूस कर रहे हैं। पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री से सिक्किम के भविष्य पर रचनात्मक बहस करने की अपील की। अपने बयान के अंत में भाजपा ने यह भी कहा कि राजनीति में तथ्य होने चाहिए, बयानबाजी नहीं; विजन होना चाहिए, डर नहीं।
बहरहाल, राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि सिक्किम प्रदेश भाजपा में अपने जनाधार को मजबूत करने की कोशिश कर रही है, लेकिन फिलहाल वह एक विचित्र स्थिति में फंसी दिख रही है। राष्ट्रीय स्तर पर एसकेएम के साथ एनडीए संबंध कायम हैं, लेकिन राज्य की स्थानीय राजनीति में सत्तारूढ़ दल ही भाजपा से दूरी बना रहा है। वहीं विपक्षी एसडीएफ भी भाजपा को अपने निशाने पर रखे हुए है।
पंचायत चुनावों में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक तापमान अभी से बढ़ने लगा है। राज्य की सत्ता में मजबूत स्थिति रखने वाला एसकेएम स्थानीय स्तर पर भाजपा से अलग राह चुनने का संकेत दे रहा है, जबकि एसडीएफ भाजपा को सिक्किम की शांति और पहचान के लिए खतरे के रूप में पेश कर रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में भाजपा को सिक्किम में अपनी राजनीतिक रणनीति और भी सावधानी से तय करनी होगी।
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