गंगटोक : केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की ओर से भारत मंडपम, नई दिल्ली में 1 और 2 सितम्बर को आयोजित दो दिवसीय विभागीय सम्मेलन में सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, जल संसाधन विभाग एवं धर्मार्थ विभाग के मंत्री सोनम लामा ने भाग लिया। सम्मेलन में जल सुरक्षा और सेवाओं की प्रभावी आपूर्ति से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्र एवं राज्यों के बीच विचार-विमर्श किया गया।
इसका उद्देश्य सहकारी संघवाद को मजबूत करना तथा टिकाऊ जल प्रबंधन के लिए साझा और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करना था। सम्मेलन में चार प्रमुख विषयों पर विशेष रूप से चर्चा की गई। इनमें जल आधारभूत संरचना परियोजनाओं का समय पर क्रियान्वयन, कैच द रेन, पेयजल स्रोतों की स्थिरता तथा ग्रामीण पेयजल आपूर्ति का संचालन एवं रखरखाव शामिल रहे।
सम्मेलन के दौरान सोनम लामा ने पहाड़ी राज्यों की विशिष्ट आवश्यकताओं को प्रमुखता से उठाते हुए जल आधारभूत संरचना की योजना और क्रियान्वयन में भौगोलिक एवं स्थलाकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जलापूर्ति और सीवरेज से संबंधित दिशा-निर्देशों की समीक्षा की जानी चाहिए, ताकि उनमें पहाड़ी राज्यों की स्थलाकृति एवं भौगोलिक परिस्थितियों को पर्याप्त रूप से शामिल किया जा सके। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों के लिए एक समान व्यवस्था अपनाने से पहाड़ी क्षेत्रों की व्यावहारिक आवश्यकताओं का पर्याप्त समाधान नहीं हो सकता।
मंत्री ने मौसम की परिस्थितियों के कारण पहाड़ी राज्यों में आधारभूत संरचना परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ने वाले प्रभाव की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि पहाड़ी राज्यों में निर्माण एवं आधारभूत संरचना से जुड़े कार्यों के लिए अनुकूल मौसम की अवधि सीमित होती है। इसलिए स्थानीय भौगोलिक एवं जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए परियोजनाओं की समय पर योजना बनाने और उनका क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। उन्होंने जलापूर्ति एवं सीवरेज आधारभूत संरचना की एकीकृत योजना बनाने की भी सिफारिश की। उन्होंने कहा कि टिकाऊ एवं प्रभावी सेवा सुनिश्चित करने के लिए जलापूर्ति परियोजनाओं के साथ ही सीवरेज उपचार संयंत्रों को भी योजना में शामिल किया जाना चाहिए।
सोनम लामा ने केंद्र सरकार की पहलों से मिलने वाले लाभों का उल्लेख करते हुए पीएमकेएसवाई और हर खेत को पानी की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से राज्य में सिंचाई सुविधाओं को मजबूत करने में मदद मिली है। साथ ही, इन पहलों ने जैविक खेती को बढ़ावा देने में भी सहयोग किया है, जिससे किसानों को लाभ मिला और कृषि आय में वृद्धि हुई है। उन्होंने सम्मेलन को यह भी जानकारी दी कि राज्य में चल रही सभी योजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। जल शक्ति मंत्रालय ने सम्मेलन के दौरान सोनम लामा द्वारा उठाए गए मुद्दों और प्रस्तुत सिफारिशों का संज्ञान लिया। सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उपस्थित रहे। उन्होंने सम्मेलन की कार्यवाही में भाग लिया और जल क्षेत्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर राज्यों तथा संबंधित हितधारकों के साथ संवाद किया।
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