पाकिम : पाकिम जिला आयुष विभाग की ओर से शुक्रवार को रेनॉक स्थित रुगदुंग पी स्कूल में आयुर्विद्या स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों, विद्यालय कर्मियों और अभिभावकों को निवारक स्वास्थ्य देखभाल, स्वस्थ जीवनशैली तथा समग्र स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम का समन्वय रेनॉक सीएचसी के होम्योपैथी चिकित्सा पदाधिकारी प्रभारी डॉ अस्विन जे खरका ने किया। इसमें विद्यालय की प्रधानाचार्य ओंगमु भूटिया और शिक्षिका तारा देवी भट्टराई ने सहयोग किया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों और अभिभावकों समेत करीब 60 लोगों ने भाग लिया। जागरूकता सत्र में दिनचर्या और ऋतुचर्या के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी गई।
प्रतिभागियों को नियमित दैनिक दिनचर्या अपनाने, व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने, संतुलित आहार लेने, पर्याप्त नींद लेने तथा मौसम में होने वाले बदलाव के अनुरूप अपनी जीवनशैली में आवश्यक परिवर्तन करने के लिए प्रेरित किया गया।कार्यक्रम के दौरान होम्योपैथी तथा सूचना, शिक्षा एवं संचार से संबंधित जागरूकता सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें होम्योपैथी के मूल सिद्धांतों की जानकारी देते हुए व्यक्ति की स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुरूप उपचार, समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण और समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेने के महत्व पर जोर दिया गया। पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को लेकर लोगों में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने का भी प्रयास किया गया।
कार्यक्रम के स्वास्थ्य जांच चरण में सभी 60 प्रतिभागियों की हीमोग्लोबिन जांच की गई। इसका उद्देश्य संभावित एनीमिया और पोषण संबंधी कमियों की शुरुआती पहचान करना था। इसके अलावा मुख्य रूप से वयस्क प्रतिभागियों और विद्यालय कर्मचारियों के बीच 32 रैंडम ब्लड शुगर जांच भी की गई, ताकि रक्त शर्करा और चयापचय संबंधी स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके। सभी प्रतिभागियों का व्यक्तिगत स्वास्थ्य आकलन और चिकित्सकीय परामर्श किया गया। उनकी स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं के आधार पर उपयुक्त होम्योपैथिक दवाओं का वितरण भी किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय समुदाय की सक्रिय भागीदारी रही। इस पहल के माध्यम से स्वास्थ्य शिक्षा, निवारक जांच और चिकित्सकीय परामर्श को एक ही मंच पर उपलब्ध कराया गया। साथ ही, रेनॉक सीएचसी की होम्योपैथी चिकित्सा टीम और विद्यालय प्रशासन के बीच समन्वय मजबूत हुआ, जिससे स्थानीय समुदाय में स्वास्थ्य जागरूकता और निवारक स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देने में मदद मिली।
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