‘वन्दे मातरम्’ की गूंज और तिरंगे के सम्मान से सराबोर हुआ गंगटोक

तिरंगा गौरव भी है और जिम्मेदारी भी : राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर

गंगटोक : सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर की गरिमामयी उपस्थिति में आज गंगटोक में राष्ट्रीय एकता, ऐतिहासिक स्मरण और देशभक्ति से ओत-प्रोत एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग भी विशिष्ट रूप से उपस्थित रहे। इस राष्ट्रव्यापी उत्सव में तीन महत्वपूर्ण ऐतिहासिक प्रसंगों का एक साथ समन्वय हुआ -‘हर घर तिरंगा अभियान’ के अंतर्गत तिरंगा यात्रा, ‘वन्दे मातरम्’ के गौरवशाली 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव, तथा ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’।

कार्यक्रम का शुभारंभ गंगटोक के एमजी मार्ग से हुआ, जहां राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने राष्ट्रध्वज लहराकर भव्य तिरंगा पदयात्रा का नेतृत्व किया। इस तिरंगा यात्रा में मंत्रिमंडल के माननीय सदस्य, विधायकगण, राज्य सरकार के उच्च प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी, विभिन्न विभागों के कर्मचारी, भारी संख्या में छात्र-छात्राएं और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। हाथों में तिरंगा थामे और देशभक्ति के नारों से गूंजता यह जनसैलाब एमजी मार्ग से आगे बढ़ते हुए मनन केन्द्र पर जाकर संपन्न हुआ। पदयात्रा के समापन के बाद मनन केन्द्र के सभागार में राज्य संस्कृति विभाग, गृह विभाग एवं सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग द्वारा एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान सभागार में भारी संख्या में जनसमुदाय उपस्थित रहा।

कार्यक्रम में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा विशेष रूप से तैयार की गई विभाजन पर आधारित डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन किया गया। राज्य संस्कृति विभाग के कलाकारों ने राष्ट्रीय गीतों और ‘वन्दे मातरम्’ की मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं, जिसने पूरे वातावरण को राष्ट्रप्रेम के रंग में सराबोर कर दिया। इस डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से देश के विभाजन के दौरान विस्थापित हुए लाखों लोगों के संघर्ष, पीड़ा और अद्वितीय साहस को प्रदर्शित किया गया। अपने संबोधन के आरंभ में राज्यपाल ने कहा कि ‘राष्ट्र की जय चेतना का गान वन्दे मातरम्, राष्ट्रभक्ति प्रेरणा का गान वन्दे मातरम्’ और सभी से इन पंक्तियों को दोहराने का आह्वान किया, जिससे पूरा सभागार गूंज उठा।

राज्यपाल ने कहा, आज का यह दिन हमें हमारे देश की अखंडता और एकता की याद दिलाता है। जहां ‘वन्दे मातरम्’ के 150 वर्ष हमें स्वतंत्रता संग्राम के उस मंत्र की ऊर्जा का स्मरण कराते हैं, वहीं ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ हमें इतिहास के उस अध्याय की याद दिलाकर शांति और सद्भाव बनाए रखने की प्रेरणा देता है। आज हम केवल एक कार्यक्रम में सम्मिलित नहीं हुए हैं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम, राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय एकता की उस महान विरासत को स्मरण करने के लिए एकत्रित हुए हैं, जिसने हमारे राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस दौरान राज्यपाल ने वंदे मातरम को उचित सम्मान दिलाने के लिए गृह मंत्री अमित शाह जी को धन्यवाद दिया ,जिन्होंने हाल ही में संसद में बिल लाकर इस गीत को क़ानूनी रूप दिया और राष्ट्रीय गीत को राष्ट्रगान की भांति अनिवार्य किया। राज्यपाल ने तिरंगे पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारे राष्ट्रीय ध्वज की यात्रा भारत के स्वतंत्रता संघर्ष की यात्रा से जुड़ी हुई है। तिरंगा हमारे लिए गौरव भी है और जिम्मेदारी भी। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान ने राष्ट्रीय ध्वज को जन-जन से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। जब देश के घर-घर में तिरंगा लहराता है, तो वह दृश्य केवल देशभक्ति का उत्सव नहीं होता, बल्कि यह संदेश देता है कि भारत की शक्ति उसके नागरिकों की एकता और सहभागिता में निहित है।

राज्यपाल ने सिक्किम को राष्ट्रीय एकता का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए उपस्थित मंत्रीगण एवं विधायकगण से अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने सभी सरकारी कार्यालयों में ‘वन्दे मातरम्’ को स्थापित करने की बात कही।

राज्यपाल ने इस बात पर जोर दिया कि हम अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन हमारा राष्ट्र एक है। हमारी भाषाएं अलग हो सकती हैं, लेकिन हमारी भावना एक है। हमारी संस्कृतियां विविध हो सकती हैं, लेकिन हमारी पहचान एक है और हम सब भारतीय हैं। इसी राष्ट्रभावना के साथ हम आगे बढ़ने और भारत को एकसशक्त, समृद्ध, आत्मनिर्भर एवं विकसित राष्ट्र बनाने में अपना योगदान देने का आह्वान किया।

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