नई दिल्ली । कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने प्रस्तावित फॉरन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026 की कड़ी आलोचना की है। सरकार मानसून सत्र में इस बिल को संसद से पास कराने की योजना पर काम कर रही है। केरल के तिरुवनंतपुरम से एमपी शशि थरूर ने सभी विपक्षी सांसदों से अपील की है कि वह इस बिल को रोकने के लिए एकजुट हो जाएं ।
कांग्रेस एमपी थरूर ने एक अखबार में छपे अपने लेख का फोटो शेयर करते हुए एक्स पर लिखा है कि मेरा अनुरोध है कि नए एफसीआरए बिल को रोकना चाहिए। उनका कहना है, भारत के विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में पीढ़ियों तक समर्पित रही संस्थानों को इस तरह से दंडात्मक कानूनी प्रक्रियाओं के दायरे में लाना उनके साथ घोर अन्याय है। अपनी चिंताओं पर उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस में एक बड़ा लेख लिखा है।
Shashi Tharoor का आरोप है कि कार्यपालिका की शक्ति के केंद्रीकरण में यह खतरनाक बढ़ोतरी है। उनका कहना है कि प्रस्तावित विधेयक ‘भारत सरकार और सिविल सोसाइटी के बीच संबंधों को मौलिक रूप से बदल देगा।’
शशि थरूर का आरोप है, वर्तमान सरकार ने नॉन-प्रॉफिट चैरिटीज, थिंक टैंक और मानवाधिकार समूहों को विकास में सहयोगी के बजाए, गड़बड़ी फैलाने और विदेशी इशारों पर काम करने वाले संगठनों के तौर पर पेश करना शुरू किया है। कांग्रेस नेता का दावा है कि विधेयक लाने से पहले से ही सरकार की सख्तियों की वजह से ‘(इनकी) विदेशी फंडिंग में 87 फीसदी की कमी आ गई है, हजारों धर्मनिरपेक्ष और सामुदायिक संगठनों का शटर मजबूरन पहले ही गिर चुका है।’
शशि थरूर को चिंता है कि अब जो सरकार कानून में बदलाव करने वाली है, उससे उसे इन संगठनों की संपत्ति जब्त करने की अनुमति मिल जाएगी, जिससे ‘इस सेक्टर के स्थायी तौर पर निपटने का खतरा है।’ थरूर का दावा है कि केरल से होने के नाते उन्हें पता है कि राज्य में ईसाई धार्मिक संस्थाओं ने एक सदी से भी ज्यादा समय से शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कितना बड़ा योगदान दिया है और नए बिल से इन संस्थाओं के अस्थिर होने का खतरा है।
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