गंगटोक : सिक्किम रूरल लाइवलीहुड मिशन (एसआरएलएम) की ओर से गुरुवार को स्थानीय एक होटल में “रणनीतिक समन्वय: ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं का एकीकरण” विषय पर राज्यस्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई।
ग्रामीण विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं में बेहतर समन्वय स्थापित, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा ग्रामीण विकास गतिविधियों में एसएचजी की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्रामीण विकास विभाग के सचिव अनिल राज राई ने की। इसमें विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न प्रमुख योजनाओं के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इनमें वीबी जी-राम-जी की मिशन निदेशक छिरिंग ल्हादेन लाचुंगपा, स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण की मिशन निदेशक कोशी कपिल, जल जीवन मिशन के अधीक्षण अभियंता प्रकाश छेत्री और पंचायती राज विभाग के उपनिदेशक केसी दहाल प्रमुख रूप से शामिल थे।
इसके अलावा, एसआरएलएम की ओर से मुख्य कार्यकारी अधिकारी आरबी भंडारी, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी सृजना छेत्री, राज्य एवं प्रखंड मिशन प्रबंधन इकाइयों के अधिकारी, ग्रामीण विकास विभाग के इंजीनियरिंग प्रकोष्ठ, लेखा शाखा तथा विभिन्न योजनाओं से जुड़े अधिकारियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में कुल 73 प्रतिभागी उपस्थित थे।
इस अवसर पर ग्रामीण विकास सचिव अनिल राज राई ने जमीनी स्तर पर योजनाओं के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए एसआरएलएम और अन्य विभागीय योजनाओं की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि बेहतर सेवा वितरण, कार्यों की पुनरावृत्ति रोकने और ग्रामीण समुदायों तक सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ पहुंचाने के लिए विभागीय समन्वय आवश्यक है।
राई ने सभी हितधारकों से सामुदायिक संस्थाओं को मजबूत करने और सिक्किम के ग्रामीण परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। इससे पहले, शुरुआत में एसआरएलएम के सीईओ आरबी भंडारी ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ पहुंचाने के लिए विभागीय योजनाओं के बीच रणनीतिक समन्वय बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि एसएचजी राज्य के सभी छह जिलों में टिकाऊ आजीविका, सामुदायिक भागीदारी और समावेशी विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
उन्होंने विभिन्न विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में एसएचजी सदस्यों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विभागों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने जल जीवन मिशन की ‘नल जल मित्र’ पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ प्रखंडों में एसएचजी सदस्यों का प्रशिक्षण अभी लंबित है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से प्रशिक्षण कार्यक्रम शीघ्र पूरा करने का आग्रह किया।
वहीं, तकनीकी सत्रों के दौरान वीबी जी-राम-जी, स्वच्छ भारत मिशन, पंचायती राज संस्थान और जल जीवन मिशन के अधिकारियों ने अपनी योजनाओं, जारी गतिविधियों और भावी कार्ययोजनाओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी। प्रस्तुतियों में एसआरएलएम के साथ समन्वय मजबूत करने तथा ग्रामीण विकास योजनाओं की योजना निर्माण, क्रियान्वयन और निगरानी में स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया।
कार्यशाला में ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास, स्वच्छता, ठोस कचरा प्रबंधन, पेयजल आपूर्ति, सामुदायिक स्तर पर संचालन एवं रखरखाव व्यवस्था तथा पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से स्थानीय शासन को मजबूत करने जैसे विषयों पर चर्चा की गई। इन योजनाओं में स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी से टिकाऊ रोजगार और आजीविका के अवसर पैदा करने पर भी विचार-विमर्श हुआ।
एसआरएलएम के राज्य स्तरीय विषय विशेषज्ञों ने मिशन की उपलब्धियों और प्रगति की जानकारी दी। आजीविका, संस्था निर्माण एवं क्षमता विकास, सामाजिक समावेशन, सामाजिक विकास और प्रबंधन सूचना प्रणाली से जुड़े विषयों पर विस्तृत प्रस्तुतियां दी गईं। इसके बाद, संवाद सत्र में प्रतिभागियों ने अपने अनुभव और सफल कार्यप्रणालियां साझा कीं। विभागीय समन्वय मजबूत करने, क्रियान्वयन व्यवस्था में सुधार लाने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
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