सोरेंग : सोरेंग के जिला प्रशासनिक केंद्र में बुधवार को जिला कलेक्टर धीरज सुबेदी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय जूनोटिक समिति की बैठक आयोजित की गई। इसके साथ ही क्लिनिकल प्रतिष्ठानों के पंजीकरण के लिए गठित जिला पंजीकरण प्राधिकरण तथा जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए जिला स्तरीय समिति की बैठक भी हुई।
बैठक को संबोधित करते हुए जिला कलेक्टर ने जनस्वास्थ्य और पशु चिकित्सा सेवाओं से जुड़े सभी अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय और व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया। उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय मजबूत करने, निगरानी एवं रिपोर्टिंग व्यवस्था बेहतर बनाने तथा जूनोटिक रोगों और जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर जन जागरुकता अभियान तेज करने का निर्देश दिया।
डीसी ने पंजीकृत सरकारी और निजी क्लिनिकल प्रतिष्ठानों का वर्ष में कम से कम एक बार व्यापक निरीक्षण करने को कहा, ताकि वैधानिक मानकों और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का पालन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने रोगों के प्रकोप से निपटने के लिए विभागों को तैयार रहने, जैव-चिकित्सा अपशिष्ट का उचित निपटान करने, स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने तथा समय-समय पर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
इससे पहले, बैठक की शुरुआत में सोरेंग की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ स्मृति राई ने कोविड-19 महामारी और जिले में सामने आए एवियन इन्फ्लुएंजा के मामलों का उल्लेख करते हुए जूनोटिक रोगों के प्रति आम लोगों एवं अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों को लगातार जागरूक करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण के तहत विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों और सामुदायिक भागीदारी पर जोर दिया।
वहीं, गेजिंग जिला अस्पताल की जिला निगरानी अधिकारी डॉ ईडन जामयांग भूटिया ने सोरेंग जिले में जूनोटिक रोगों की स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि अगस्त 2025 से जुलाई 2026 तक जिले में स्क्रब टाइफस के 50 मामले, कुत्ते के काटने के 846 मामले, सांप काटने के 15 मामले और अन्य जानवरों के काटने के 507 मामले दर्ज किए गए। उन्होंने कहा कि जूनोटिक रोगों के जन स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए निरंतर निगरानी, समय पर रिपोर्टिंग और विभागों के बीच समन्वित कार्रवाई बेहद जरूरी है।
उनके साथ, पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग की संयुक्त निदेशक डॉ कुंजांग पाल्मू भूटिया ने एवियन इन्फ्लुएंजा पर अपनी प्रस्तुति में बीमारी के कारणों, संक्रमण तरीकों, पक्षियों में दिखाई देने वाले लक्षणों और जिले में इसके फैलाव की स्थिति के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बीमारी को फैलने से रोकने के लिए निगरानी, जैव सुरक्षा उपायों, शीघ्र पहचान और तत्काल रिपोर्टिंग को आवश्यक बताया।
संयुक्त स्वच्छता निदेशक सावित्री गुरुंग ने जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन नियमों का उद्देश्य संक्रमण की रोकथाम, कर्मचारियों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को प्रभावी बनाना है।
बैठक में रंगों के अनुसार निर्धारित कूड़ेदानों, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों और अन्य अपशिष्ट प्रबंधन सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ जैव-चिकित्सा अपशिष्ट के पृथक्करण, संग्रह, परिवहन, उपचार और निपटान व्यवस्था की नियमित समीक्षा करने पर चर्चा हुई। इसके अलावा, बैठक में क्लिनिकल प्रतिष्ठानों के जिला पंजीकरण प्राधिकरण की भूमिका और कार्यों की भी समीक्षा की गई। समिति ने पंजीकरण और नवीनीकरण के आवेदनों का निपटारा करने, निर्धारित न्यूनतम मानकों के अनुपालन की जांच करने, जरूरत पड़ने पर निरीक्षण करने तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ उचित कार्रवाई की अनुशंसा करने पर विचार-विमर्श किया।
बैठक में सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और पूरे जिले में ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण को प्रभावी रूप से लागू करने का निर्णय लिया गया। बैठक में एडीसी (विकास) ओंगदी शेरपा, एएसपी परशुराम शर्मा, एमईओ रोशन शर्मा, वन्यजीव रेंज अधिकारी कृष्ण दहाल, पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. जुलिना सुब्बा और डॉ कांता बस्नेत तथा जिला स्वास्थ्य शिक्षक अविरल सुब्बा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
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