क्याब्जे दोद्रुपचेन रिंपोछे की 100वीं जयंती मनी

मंगन : उत्तर सिक्किम के मालिंग स्थित न्येसोंग कुंद्रोल मणि ल्हाखांग में रविवार को परम पूज्य क्याब्जे दोद्रुपचेन रिंपोछे की 100वीं जयंती श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उत्साह के साथ मनाई गई। मालिंग न्येसोंग कुंद्रोल मणिलाखांग समिति द्वारा आयोजित इस समारोह में राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं, भिक्षुओं, स्थानीय निवासियों एवं गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रिंस पालदेन ग्युरमेद नामग्याल थे। इस अवसर पर पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन विभाग के अध्यक्ष सोनम नोर्गे लाचुंग्पा, मंगन जिला परिषद की उपाध्यक्ष सोनम किपा भूटिया, एसडीएम संदीप कुमार, ओएसडी लाचेन छिरिंग वांग्याल भूटिया सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। यह समारोह क्याब्जे दोद्रुपछेन रिंपोछे के जीवन, शिक्षाओं और आध्यात्मिक विरासत को समर्पित था। साथ ही मालिंग मणिलाखांग के ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व को भी रेखांकित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ समिति सदस्य कर्मा भूटिया के स्वागत भाषण से हुआ। इसके बाद मणि आम मेनलोम के पाठ और जेकछू अनुष्ठान के बीच केक काटकर जयंती समारोह मनाया गया।

मंगन वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय तथा नॉर्थ सिक्किम अकादमी के विद्यार्थियों ने भूटिया, लेप्चा और नेपाली भाषाओं में राज्य गीत प्रस्तुत किया। इस अवसर पर खेनत्रुल रिनपोछे ने भूटिया भाषा में इस पावन अवसर की महत्ता पर प्रकाश डाला, जिसका नेपाली भाषा में अनुवाद कर्मा भूटिया ने किया। समारोह के दौरान मणि ल्हाखांग के विकास एवं संरक्षण में योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित भी किया गया। मुख्य अतिथि प्रिंस पालदेन ग्युरमेद नामग्याल ने अपने संबोधन में सिक्किम की समृद्ध आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने क्याब्जे दोद्रुपछेन रिंपोछे की शिक्षाओं को मानवता के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए मालिंग और मंगन के लोगों की सांस्कृतिक विरासत एवं सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के प्रयासों की सराहना की।

ओएसडी छिरिंग वांग्याल भूटिया ने भी कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इस ऐतिहासिक अवसर का हिस्सा बनने पर प्रसन्नता व्यक्त की। वहीं एसडीएम संदीप कुमार ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपरा और बौद्ध धर्म की शिक्षाओं से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम का समापन नॉर्थ सिक्किम अकादमी के निदेशक फुंत्सोक नामग्याल काजी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने मुख्य अतिथि, अतिथियों, आयोजकों, श्रद्धालुओं एवं सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इसके बाद सामुदायिक भोज का आयोजन किया गया। क्याब्जे दोद्रुपछेन रिनपोछे की शताब्दी जयंती समारोह ने उनकी महान आध्यात्मिक विरासत को सम्मानपूर्वक स्मरण करते हुए करुणा, ज्ञान और सांस्कृतिक संरक्षण के मूल्यों को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने का संदेश दिया।

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