पर्यटन की राह में रोड़ा बनी पश्चिम सिक्किम की जर्जर सड़क

एनएचआईडीसीएल और पीडब्ल्यूडी के बीच समन्वय की कमी पर उठे सवाल

गेजिंग : पश्चिम सिक्किम की लाइफलाइन मानी जाने वाली लेगशेप-गेजिंग सड़क की खराब हालत को लेकर स्थानीय निवासियों, पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों और जनप्रतिनिधियों में चिंता बढ़ गई है। लगभग 15 किलोमीटर लंबा यह मार्ग गेजिंग जिला मुख्यालय को क्षेत्र के अन्य हिस्सों से जोड़ता है, लेकिन सड़क एवं पुल विभाग तथा एनएचआईडीसीएल के बीच समन्वय की कमी और उचित रखरखाव न होने के कारण यह सड़क वर्षों से जर्जर स्थिति में है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क के उन्नयन की उनकी मांग कई वर्षों से लंबित है और दोनों एजेंसियां एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालती रही हैं। मानसून के दौरान स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब भूस्खलन, कीचड़युक्त हिस्सों और धंसाव वाले क्षेत्रों के कारण यातायात बार-बार बाधित होता है। कई बार वाहन घंटों तक फंसे रहते हैं, जबकि बड़े भूस्खलन के कारण सड़क कई दिनों तक बंद हो जाती है।

हाल ही में, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा के गेजिंग सफर के दौरान पांच जीपीयू के जिला पंचायत सदस्यों ने लेगशिप-गेजिंग सड़क को पेलिंग तक चौड़ा एवं उन्नत करने और कारपेटिंग की मांग करते हुए एक ज्ञापन दिया था। इसी तरह का एक ज्ञापन सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर को उनके गेजिंग दौरे के दौरान भी दिया गया था। लेकिन, अभी तक इस पर कोई पहल नहीं हुई है।

जिला पंचायत सदस्यों और पंचायत प्रतिनिधियों ने इस बात पर जोर दिया है कि लेगशिप-गेजिंग सडक़ पर न सिर्फ कारपेटिंग, बल्कि इसे ठीक से चौड़ा कर पूरी तरह अपग्रेड करने की भी जरूरत है। उन्होंने कहा कि आबादी में लगातार बढ़ोतरी और बढ़ते पर्यअन उद्योग के साथ आने वाले समय में इस रास्ते पर यातायात समस्या बढऩे की संभावना है, जिससे सडक़ को चौड़ा और आधुनिक करना बहुत जरूरी हो गया है।

वहीं, सड़क की खराब स्थिति का असर पश्चिम सिक्किम के पर्यटन पर भी पड़ रहा है। जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल पेलिंग तक पहुंचने में पर्यटकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन इसके लिए बेहतर सड़क अवसंरचना आवश्यक है।

गेजिंग ओमचुंग जिला पंचायत सदस्य सागर शर्मा ने बताया कि एनएचआईडीसीएल द्वारा सडक़ के लिए एक बार के रखरखाव परियोजना को मंजूरी दी गई है। प्रारंभिक रूप से इस परियोजना की लागत 12 करोड़ रुपये से अधिक निर्धारित की गई थी, लेकिन बाद में इसका टेंडर लगभग 7 करोड़ रुपये में अंतिम रूप दिया गया। शर्मा ने रखरखाव कार्य का स्वागत करते हुए कहा कि इससे केवल अस्थायी राहत मिलेगी।

शर्मा ने कहा कि बढ़ते यातायात दबाव, यात्रियों की सुरक्षा और भविष्य की परिवहन आवश्यकताओं को देखते हुए सडक़ का व्यापक चौड़ीकरण और उन्नयन बेहद जरूरी है। वहीं, लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि परियोजना का संचालन सीधे एनएचआईडीसीएल कर रहा है और राज्य विभाग की भूमिका केवल सीमित निगरानी तक है।

लोक निर्माण विभाग के गेजिंग डिवीजन के असिस्टेंट इंजीनियर संतोष सिंह ने कहा कि उन्हें इस मामले की कोई पक्की जानकारी नहीं है, क्योंकि विभाग को एनएचआईडीसीएल की ओर से आधिकारिक तौर पर कोई सूचना नहीं दी गई है। उन्होंने साफ किया कि लेगशिप-गेजिंग रोड परियोजना से जुड़े सभी मामले सीधे एनएचआईडीसीएल द्वारा देखे जाते हैं। हालांकि, जब पीडद्ब्रल्यूडी की भूमिका के बारे में पूछा गया, तो सिंह ने कहा कि हालांकि एनएचआईडीसीएल प्रोजेक्ट से जुड़े सभी कामों के लिए जिम्मेदार एजेंसी है, लेकिन प्रोजेक्ट को लागू करने के दौरान पीडब्‍ल्‍यूडी की भूमिका सीमित और निगरानी करने वाली होती है।

बहरहाल, स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रस्तावित रखरखाव कार्य से सडक़ की वर्तमान स्थिति में कुछ सुधार होगा, लेकिन वे लेगशिप-गेजिंग-पेलिंग मार्ग के चौड़ीकरण और आधुनिकीकरण के रूप में स्थायी समाधान की मांग पर कायम हैं।

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