‘वाइब्रेंट विलेज’ का दावा, लेकिन सड़क के लिए तरस रहा लाचेन

केंद्रीय मंत्री सिंधिया के दौरे से जगी उम्मीद

गंगटोक : केंद्र सरकार की वाइब्रेंट विलेज योजना में शामिल किए जाने के बावजूद उत्तर सिक्किम के सीमावर्ती गांव लाचेन में सड़क संपर्क की समस्या अब भी गंभीर बनी हुई है। इसके कारण, स्थानीय लोगों को आवाजाही, चिकित्सा सुविधा, राशन, गैस सिलेंडर और दैनिक जरूरतों के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। केंद्रीय संचार और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के हालिया सिक्किम दौरे के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है।

तामदिंग छेवांग नामक एक स्थानीय निवासी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से लाचेन वासियों की पीड़ा साझा की। उन्होंने लिखा कि सबसे कठिन बात यह है कि अपने घर तक पहुंचना भी जोखिम से भरा है। सड़क संपर्क सही नहीं होने के कारण बीमारी की स्थिति में इलाज के लिए जाना भी जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है। छेवांग के अनुसार, पिछले तीन वर्षों से कई अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल की छुट्टियों में घर लाने से बच रहे हैं, क्योंकि सडक़ें सुरक्षित नहीं हैं। बुजुर्ग और बीमार लोग भी लंबे समय से परेशानी झेल रहे हैं। कई घरों में गैस सिलेंडर और राशन की कमी के कारण नियमित भोजन तक प्रभावित हो रहा है। उन्होंने लिखा कि लाचेन के लोग दुनिया से कटे हुए महसूस कर रहे हैं और बेहतर सडक़ संपर्क के लिए सभी सिक्किमवासियों से समर्थन की अपील की।

लाचेन भारत-चीन सीमा के पास स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यह इलाका मुख्य रूप से चुंगथांग-लाचेन सड़क पर निर्भर है। वर्ष 2023 की आपदा के बाद लगातार भूस्खलन और सडक़ क्षति के कारण यह क्षेत्र कई बार लंबे समय तक संपर्क से कट गया। सीमा सडक़ संगठन (बीआरओ) और ग्रेफ की ओर से मरम्मत कार्य जारी है, लेकिन कठिन हिमालयी भूभाग, कमजोर पारिस्थितिकी और संसाधनों की कमी के कारण काम धीमी गति से आगे बढ़ रहा है।

उल्लेखनीय है कि यह मुद्दा ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार 2023 में शुरू किए गए वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के जरिए सीमावर्ती गांवों में विकास को आगे बढ़ा रही है। इस पहल में सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख जैसे राज्यों के सीमावर्ती गांव शामिल हैं। इसका मुख्य मकसद ढांचागत सुविधाओं को बेहतर बनाना, रोजगार एवं पर्यटन को बढ़ावा देना और अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण गांवों से पलायन कम करना है। प्रोग्राम के पहले चरण में, 662 गांवों को चुना गया था। सिक्किम के लगभग 58 गांवों को अलग-अलग चरण में कवर किया गया है।

इसी बीच, लाचेन-मंगन के विधायक एवं मंत्री साम्दुप लेप्चा ने सोमवार को स्थानीय लोगों की कठिनाइयों को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि लोगों ने बहुत कष्ट झेले हैं और यात्रा बेहद कठिन रही है। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्थानीय लोगों की समस्याएं उचित अधिकारियों तक पहुंचें। उन्होंने कहा कि जब नेता आकर लोगों की बात सुनते हैं, तो लोगों को कुछ राहत महसूस होती है।

लेप्चा ने क्षेत्र को सामरिक रूप से महत्वपूर्ण और भौगोलिक रूप से संवेदनशील बताते हुए कहा कि यदि पहले से उचित योजना बनाई गई होती, तो शायद ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती। हालांकि उन्होंने बीआरओ और ग्रेफ को पूरी तरह दोषी ठहराने से इनकार किया और कहा कि जमीन और सड़कों की स्थिति काफी कठिन है। लाचेन और लाचुंग के लोगों ने भी काफी परेशानी झेली है।

मंत्री के अनुसार, सड़क संपर्क बहाल करने का लक्ष्य 16 जुलाई रखा गया है। ग्रेफ के कर्मचारी और मशीनें काम कर रही हैं, लेकिन जनशक्ति और मशीनरी की सीमाएं भी हैं। उन्होंने कहा कि यदि दिए गए आश्वासन पूरे नहीं होते हैं, तो इस मामले को गृह मंत्रालय और प्रधानमंत्री तक ले जाया जा सकता है।

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पिछले महीने की 14 से 16 तारीख तक सिक्किम का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने शिक्षा, पर्यटन, खेल और संपर्क से जुड़ी परियोजनाओं की समीक्षा की। हालांकि लाचेन सडक़ समस्या पर उनके सार्वजनिक बयान सीमित रहे, लेकिन संचार मंत्री के रूप में हर गांव तक मोबाइल और इंटरनेट संपर्क पहुंचाने पर उनका जोर उत्तर-पूर्व में आधारभूत ढांचा मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

केंद्र और राज्य सरकार की ओर से कुछ अस्थायी उपाय भी किए जा रहे हैं। ताराम चू पर अस्थायी पुल तैयार किया गया है, जिससे आवाजाही में कुछ सुविधा मिली है। हालांकि सुरक्षा कारणों से भारी सामान की आवाजाही पर अब भी प्रतिबंध है। जहां संभव हो, यात्रा परमिट भी जारी किए जा रहे हैं। बहरहाल, लाचेन वासियों के लिए वाइब्रेंट विलेज योजना अब भी उम्मीद का प्रतीक है। उन्हें बेहतर सड़क, सुरक्षित यात्रा, स्वास्थ्य सेवा, पर्यटन और रोजगार के अवसरों की उम्मीद है। लेकिन फिलहाल स्थानीय परिवारों की सबसे बड़ी मांग सुरक्षित और भरोसेमंद सडक़ संपर्क है, ताकि रोजमर्रा की जिंदगी को जोखिम के बिना आगे बढ़ाया जा सके।

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