चाय खेती बनेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई ताकत: डीटी लेप्चा

क्षेत्रीय ब्रांडिंग व्यवस्था विकसित करने की जरूरत : पामिन लेप्चा

पाकिम : चाय की खेती से जुड़े मुद्दों, विकास पहलुओं और स्थानीय छोटे चाय उत्पादकों के कल्याण पर चर्चा करने हेतु टी ग्रोअर्स वेलफेयर बोर्ड, नाथांग माचोंग की ओर से आज यहां टी ग्रोअर्स मीट का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद डीटी लेप्चा और विधायक सह महिला, बाल, वरिष्ठजन एवं दिव्यांग कल्याण सलाहकार पामिन लेप्चा उपस्थित रहीं। उनके साथ, पाकिम डीसी परी बिश्नोई, डीएफओ सोनम पिंछो भूटिया, एसडीएम एनके भंडारी, टी बोर्ड ऑफ इंडिया की फुरी शेरपा और सिलीगुड़ी के फैक्ट्री सलाहकार अधिकारी सुबीर पॉल भी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर सांसद लेप्चा ने कहा कि सिक्किम में चाय बागानों का विकास स्थायी आजीविका से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सपना है। उन्होंने कहा कि चाय पर्यटन और टाउनशिप विकास के माध्यम से आने वाले वर्षों में क्षेत्र में आर्थिक प्रगति की बड़ी संभावना है। उन्होंने चाय उत्पादकों से बागान क्षेत्रों की सुरक्षा और रखरखाव की जिम्मेदारी लेने की अपील की।

सांसद ने छोटे चाय उत्पादकों को अनिवार्य क्यूआर आधारित पहचान पत्र बनवाने की सलाह दी, ताकि वे सरकारी सहायता और योजनाओं का लाभ उठा सकें। साथ ही, उन्होंने एसआईआर पहल का भी उल्लेख करते हुए कहा कि कोई भी वास्तविक लाभार्थी इससे वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और जनता से इस पहल को आसानी से और असरदार तरीके से लागू करने के लिए पूरा सहयोग देने की अपील की।

वहीं, विधायक पामिन लेप्चा ने कहा कि क्षेत्र में चाय खेती की अपार संभावना है। तकनीकी विशेषज्ञता और संस्थागत सहयोग मिलने पर यह इलाका एक सफल और टिकाऊ चाय उत्पादक क्षेत्र के रूप में विकसित हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल चाय खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण सशक्तिकरण, रोजगार सृजन और आर्थिक विकास का माध्यम भी है।

विधायक ने टी बोर्ड से क्षेत्र में नियमित जागरुकता शिविर, प्रशिक्षण कार्यक्रम और फील्ड डेमो आयोजित करने का भी आग्रह किया। साथ ही चाय उत्पादकों के समूह, सहकारी समितियां और क्षेत्रीय ब्रांडिंग व्यवस्था विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि स्थानीय चाय फैक्ट्री की स्थापना के लिए करीब तीन एकड़ भूमि चिन्हित की गई है और अधिग्रहण प्रक्रिया जारी है।

कार्यक्रम में टी बोर्ड ऑफ इंडिया के अधिकारियों ने चाय की मात्रा के बजाय गुणवत्ता पर ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जलवायु जैविक और ऑर्थोडॉक्स चाय उत्पादन के लिए अनुकूल है। अधिकारियों ने बेहतर पौध सामग्री, वैज्ञानिक खेती, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार संपर्क को मजबूत करने पर जोर दिया।

बैठक में छोटे चाय उत्पादकों के लिए वित्तीय सहायता, सब्सिडी योजनाओं, खेती तकनीक, फैक्ट्री स्थापना और विपणन रणनीति पर भी चर्चा हुई। स्वयं सहायता समूहों और छोटे चाय उत्पादकों के लिए विभिन्न योजनाओं, पात्रता मानदंड, प्रशिक्षण, स्वास्थ्य जागरुकता और शैक्षिक सहायता से संबंधित जानकारी भी दी गई।

इस दौरान, टी ग्रोअर्स वेलफेयर बोर्ड के अध्यक्ष कमल काफ्ले ने क्षेत्र में चाय खेती के इतिहास, संगठन की उपलब्धियों, चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला। इससे पहले राज्यसभा सांसद डीटी लेप्चा ने टी बोर्ड और टी ग्रोअर्स वेलफेयर बोर्ड के अधिकारियों के साथ चाय बागान स्थल का निरीक्षण किया और स्थानीय संभावनाओं व चुनौतियों की जानकारी ली। कार्यक्रम में विभिन्न पंचायत अध्यक्ष, विभागीय अधिकारी और अलग-अलग क्षेत्रों से आए चाय उत्पादक उपस्थित रहे।

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