गंगटोक नगर निगम का भूमि अभिलेख होगा डिजिटल : भूटिया

गंगटोक : डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत गंगटोक नगर निगम क्षेत्र में भूमि सर्वेक्षण पायलट प्रोजेक्ट के कार्यान्वयन के संबंध में आज भूमि राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा यहां एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर जानकारी दी गई।

इस अवसर पर भूमि राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव सह राहत आयुक्त रिनजिंग छेवांग भूटिया ने कहा कि इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य आधुनिक सर्वेक्षण तकनीकों-जिसमें जीपीएस और जीआईएस आधारित मैपिंग प्रणाली शामिल हैं-के माध्यम से नवीनतम डिजिटल शहरी भूमि अभिलेख तैयार करना है। इसका लक्ष्य शहरी भूमि प्रशासन में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और दक्षता को मजबूत करना है।

उन्होंने बताया कि यह सर्वेक्षण गंगटोक नगर निगम के अंतर्गत आने वाले 19.02 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में किया जा रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कार्य केवल एक नियमित फील्ड सर्वेक्षण नहीं होकर एक व्यापक शहरी भूमि संदर्भ अद्यतन और डिजिटलीकरण कार्यक्रम है। इसके तहत भूखंडों और इमारतों सहित सभी खड़ी संरचनाओं का माप और सत्यापन किया जा रहा है।

भूटिया ने जानकारी देते हुए बताया कि मौजूदा नगरपालिका भूमि अभिलेख अभी भी काफी हद तक 1952 में किए गए सर्वेक्षणों पर ही निर्भर हैं। हालांकि, 1970 और 1982 के बीच संशोधित सर्वेक्षण और नक्शे तैयार किए गए थे, लेकिन उन अभिलेखों का पूरी तरह से सत्यापन और कार्यान्वयन नहीं हो सका। इसके परिणामस्वरूप प्रशासनिक जटिलताएं, भूमि विवाद और सीमा संबंधी समस्याएं उत्पन्न हुईं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में सर्वेक्षण का कार्य चुनिंदा वार्डों में चल रहा है, जिनमें देवराली, लोअर ताडोंग-6 माइल और रानीपूल शामिल हैं। कुछ क्षेत्रों में फील्ड सर्वेक्षण और डेटा संग्रह का कार्य पहले ही पूरा हो चुका है, जबकि अन्य वार्डों में सत्यापन, दस्तावेजीकरण और तकनीकी मूल्यांकन का कार्य अभी भी प्रगति पर है।

वहीं, इस पहल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए भूटिया ने कहा कि अद्यतन भूमि अभिलेख निवासियों को विरासत हस्तांतरण, पुनर्विकास कार्यों, व्यापार लाइसेंस आवेदनों, अधिभोग अनुमतियों और संपत्ति से संबंधित अन्य प्रक्रियाओं में सहायता प्रदान करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि पुराने या गलत मापों के कारण अक्सर कानूनी जटिलताएं उत्पन्न होती हैं, जिससे भविष्य के लेन-देन में संचयी उल्लंघन तथा जुर्माने की स्थिति बन जाती है।

विभागीय सचिव सह राहत आयुक्त ने आगे बताया कि सर्वेक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद संपत्ति मालिकों को ‘शहरी संपत्ति कार्ड’ जारी किए जाएंगे। इन कार्डों में संपत्ति के मालिकाना हक और तकनीकी विवरण की ताजा जानकारी होगी, जिससे भविष्य में जमीन के लेन-देन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में आसानी होगी। इस दौरान, विशेष सचिव सह नक्शा प्रोजेक्ट के नोडल अधिकारी एचके छेत्री ने इस प्रोजेक्ट को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए जनता के सहयोग का आग्रह किया।

No Comments:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

National News

Politics