युद्ध नहीं, संवाद से निकलेगा समाधान : पीएम मोदी

वैश्विक संस्थानों में सुधार और बहुपक्षीय सहयोग को बताया समय की जरूरत

ओस्लो । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में तनाव के माहौल के बीच नई दिल्ली के भू-राजनीतिक रुख को मजबूती से रेखांकित किया। उन्होंने सोमवार को पश्चिम एशिया संकट और यूक्रेन युद्ध के तत्काल समाधान के लिए संवाद और कूटनीति की पैरवी की। प्रधानमंत्री ने कहा कि एकतरफा सैन्य कार्रवाई से स्थायी शांति हासिल नहीं की जा सकती है।

स्वीडन से ओस्लो पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने अपने नॉर्वे के समकक्ष जोनस गाहर स्टोरे के साथ बैठक की। इसके बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, भारत और नॉर्वे दोनों नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और सक्रिय कूटनीतिक सहभागिता के प्रति साझा दृष्टिकोण रखते हैं।

उन्होंने कहा, भारत और नॉर्वे दोनों नियम-आधारित व्यवस्था, संवाद और कूटनीति में विश्वास रखते हैं। हम सहमत हैं कि कोई भी मुद्दा केवल सैन्य संघर्ष से हल नहीं किया जा सकता। मौजूदा वैश्विक संकटों पर प्रधानमंत्री ने कहा, चाहे यूक्रेन हो या पश्चिम एशिया, हम संघर्ष के शीघ्र अंत और शांति के लिए हर प्रयास का समर्थन करते रहेंगे। नॉर्वे की यात्रा पीएम मोदी के चार यूरोपीय देशों के दौरे का एक अहम चरण है।

प्रधानमंत्री ने बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि वैश्विक सहयोग को और गहरा किया जा सके। उन्होंने कहा, हम इस बात पर भी सहमत हैं कि वैश्विक संस्थानों में सुधार बढ़ती वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए जरूरी है। पीएम मोदी ने आगे जोर देकर कहा, आतंकवाद के हर रूप को जड़ से समाप्त करना हमारी साझा प्रतिबद्धता है।

प्रधानमंत्री ने पहलगाम आतंकी हमले को याद किया। इस हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान गई थी, जिनमें अधिकांश पर्यटक थे और इस संकट के दौरान ओस्लो ने नई दिल्ली के लिए कूटनीतिक समर्थन जताया था।

प्रधानमंत्री ने कहा, मैं पिछले वर्ष नॉर्वे की यात्रा करने वाला था, लेकिन पहलगाम में हुए आतंकी हमले के कारण वह यात्रा स्थगित करनी पड़ी। उस कठिन समय में नॉर्वे ने आतंकवाद के खिलाफ भारत का मजबूती से साथ दिया, जो सच्ची मित्रता को दर्शाता है। दोनों लोकतंत्रों के बीच स्थायी संबंधों को दोहराते हुए उन्होंने आगे कहा, आज, जब मैं नॉर्वे का दौरा कर रहा हूं, मैं उस एकजुटता के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं।

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के नेतृत्व वाले हिंद-प्रशांत महासागर पहल में नॉर्वे के औपचारिक रूप से शामिल होने का स्वागत किया और इसे समुद्री सहयोग को बढ़ाने वाला कदम बताया।

ओस्लो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संयुक्त प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनस गाहर स्टोरे ने कहा कि दुनिया में बढ़ती अनिश्चितता के बीच कूटनीति, व्यापार और तकनीक को हथियार बनाने की कोशिशों के खिलाफ सभी देशों को एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत और नॉर्वे हर मुद्दे पर हमेशा एक जैसी राय नहीं रखते। लेकिन दोनों लोकतांत्रिक मूल्यों, संवाद और सहयोग में विश्वास करते हैं।

नॉर्वे के प्रधानमंत्री ने कहा कि बढ़ते संरक्षणवाद और भू-राजनीतिक तनाव के दौर में नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था का समर्थन पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि अलगाव और एकतरफा फैसलों की बजाय सहयोग बेहतर परिणाम देता है, खासकर वैश्विक चुनौतियों से निपटने में।

उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं ने यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया की स्थिति समेत कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की। स्टोरे ने भारत और नॉर्वे के राजनयिकों के बीच लगातार संपर्क की सराहना करते हुए कहा कि इससे जटिल वैश्विक चुनौतियों से निपटने में मदद मिली है।

प्रधानमंत्री मोदी इस समय पांच देशों की यात्रा पर हैं और नॉर्वे उनका चौथा पड़ाव है। इससे पहले वह यूएई, नीदरलैंड और स्वीडन का दौरा कर चुके हैं। नॉर्वे यात्रा के दौरान पीएम मोदी तीसरे इंडिया-नॉर्डिक सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और नॉर्वे के राजा हेराल्ड पंचम तथा रानी सोन्या से भी मुलाकात करेंगे।

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