शहरी स्थानीय निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

गंगटोक : महिला, बाल, वरिष्ठ नागरिक एवं दिव्यांगजन कल्याण विभाग द्वारा सोमवार को जीएमसी सम्मेलन कक्ष में शहरी स्थानीय निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए एक दिवसीय उन्मुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रतिनिधियों को दिव्यांगजन अधिकार, सामाजिक कल्याण योजनाओं तथा राज्य में संचालित विभिन्न सरकारी सुविधाओं की जानकारी प्रदान करना था। प्रशिक्षण में दिव्यांगता के 21 मान्यता प्राप्त प्रकारों, दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (आरपीडब्ल्यूडी एक्ट)-2016 तथा विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं पर विशेष चर्चा की गई।

कार्यक्रम के स्वागत संबोधन में संयुक्त निदेशक ताशी डोमा भूटिया ने दिव्यांगजन अधिकारों एवं सामाजिक कल्याण उपायों के प्रति निर्वाचित प्रतिनिधियों को संवेदनशील बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पार्षद एवं जनप्रतिनिधि सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा जरूरतमंद लोगों तक लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

दिव्यांगजन संयुक्त आयुक्त डॉ एमबी छेत्री ने आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम-2016 के अंतर्गत मान्यता प्राप्त दिव्यांगताओं की विभिन्न श्रेणियों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने देश में दिव्यांग अधिकार कानूनों के विकासक्रम की जानकारी देते हुए राज्य में अधिनियम के क्रियान्वयन की स्थिति से भी प्रतिभागियों को अवगत कराया। साथ ही सार्वजनिक सेवाओं में सुगमता, समावेशिता और समान अवसरों के महत्व पर प्रकाश डाला।

तकनीकी सत्र के दौरान अतिरिक्त निदेशक सोनम ल्‍हमू भूटिया ने आईसीडीएस योजना तथा उसके राज्यव्यापी प्रभाव की जानकारी दी। उन्होंने कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में कार्यरत जमीनी स्तर के कर्मचारियों की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की। वहीं वरिष्ठ पी एंड ओ अभियंता एलपी भूटिया ने विभाग के दिव्यांगजन अनुभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। सहायक निदेशक ने एनएसएपी एवं एएमए योजना के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की।

कार्यक्रम में जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी, गंगटोक कार्यालय के प्रतिनिधि ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने मिशन वात्सल्य योजना के अंतर्गत उपलब्ध विभिन्न लाभों और सुविधाओं की जानकारी दी। प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य में संचालित प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं और नीतिगत ढांचे से निर्वाचित प्रतिनिधियों को परिचित कराने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ। कार्यक्रम में समावेशी एवं जनकेंद्रित शासन व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए आपसी समन्वय और सहयोग पर विशेष जोर दिया गया।

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