नामची : 8वें पोषण पखवाड़ा के अवसर पर महिला, बाल, वरिष्ठजन एवं दिव्यांग कल्याण विभाग के तत्वावधान में नामची ग्रामीण परियोजना द्वारा तेमी जोन के एफालटार आईसीडीएस केंद्र में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में एफालटार वार्ड पंचायत सदस्य खेमराज पौड्याल मुख्य रूप से शामिल हुए। उनके साथ, सीडीपीओ लक्ष्मण तमांग, पोषण एडी सोफिया लेप्चा, जिला समन्वयक प्रणय शर्मा, पर्यवेक्षक झरना तमांग, तिमी सार्वजनिक स्वास्थ्य उप-केंद्र की स्टाफ नर्स आशिका तिवारी और कार्यालय सहायक हीना पौड्याल के साथ कई अन्य भी उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि ने बच्चे के जीवन के पहले 1,000 दिनों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि पहले छह महीनों तक बच्चे को केवल मां का दूध ही दिया जाना चाहिए और उसके बाद उचित पूरक आहार शुरू करना चाहिए। उन्होंने इस अभियान के तहत विभिन्न गतिविधियों को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की भी सराहना की।
वहीं, जिला समन्वयक प्रणय शर्मा ने इस पहल को एक “जन आंदोलन” बताया और चल रहे इस कार्यक्रम की सफलता सुनिश्चित करने के लिए सभी से सामूहिक जिम्मेदारी निभाने का आग्रह किया। उन्होंने समझाया कि हर साल इस अभियान के विषय (थीम) बदलते रहते हैं, ताकि नई उभरती चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके। उन्होंने इस बात को दोहराया कि बच्चे का विकास गर्भ से ही शुरू हो जाता है और यही विकास एक सक्षम नागरिक समाज की नींव रखता है। वहीं, बच्चों में स्क्रीन के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए उन्होंने माता-पिता के ज़्यादा कड़े नियंत्रण और जागरूकता की अपील की।
उनके साथ, पोषण एडी सोफिया लेप्चा ने भी अपने एक दिलचस्प सत्र में एक ही घर के दो बच्चों की तुलनात्मक कहानी के जरिए देखभाल और पोषण में असमानता के नतीजों को समझाया। उन्होंने जन्म के पहले घंटे के भीतर ही स्तनपान शुरू करने के महत्व पर जोर दिया और बताया कि कोलोस्ट्रम (माँ के दूध का पहला गाढ़ा हिस्सा) कितना फायदेमंद होता है।
लेप्चा ने व्यवहार से जुड़े पहलुओं पर भी बात की और जंक फूड का सेवन कम करने के लिए रणनीतियां सुझाईं और बच्चों के रोजमर्रा के जीवन में माता-पिता की सक्रिय भागीदारी के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने सप्लीमेंट्स का सेवन खुद से तय करने के प्रति आगाह किया और बच्चों के डॉक्टरों से सलाह लेने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने आगे कहा कि बच्चे के वजन की नियमित मासिक निगरानी करना, विकास से जुड़ी समस्याओं का शुरुआती चरण में ही पता लगाने के लिए बहुत ज़रूरी है।
कार्यक्रम में 11 अलग-अलग जगहों के आंगनबाड़ी केंद्रों से आए लोगों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का समापन सभी संबंधित पक्षों और समुदाय के सदस्यों के इस नए संकल्प के साथ हुआ कि वे पोषण के परिणामों को बेहतर बनाने और बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करेंगे।
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