पाकिम : पूर्वोत्तर राज्यों के सहकारी संस्थानों के बीच आपसी सहयोग और एकता को मजबूत करने के उद्देश्य से ‘कोऑपरेटिव संवाद’ कार्यक्रम के तहत सिक्किम स्टेट कोऑपरेटिव यूनियन (एसआईसीयूएन) का प्रतिनिधिमंडल मिजोरम पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने आइजोल स्थित मिजोरम स्टेट कोऑपरेटिव यूनियन के कार्यालय का दौरा किया। एसआईसीयूएन अध्यक्ष तथा नॉर्थ ईस्ट स्टेट कोऑपरेटिव यूनियंस फोरम के मुख्य समन्वयक डॉ. मंगल जीत राई के नेतृत्व वाले इस प्रतिनिधिमंडल में अरुणाचल प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव यूनियन के अध्यक्ष तथा फोरम के सहायक मुख्य समन्वयक नबाम ताही नेकिल, त्रिपुरा स्टेट कोऑपरेटिव यूनियन के सुवेंदु बर्मन और सिक्किम स्टेट कोऑपरेटिव यूनियन के कर्मचारी मौजूद थे।
मिजोरम पहुंचने पर मिजोरम स्टेट कोऑपरेटिव यूनियन के अध्यक्ष के लालछमरेइया और उपाध्यक्ष सह सीईओ पु रुआतफेला ने प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस अवसर पर डॉ मंगल जीत राई ने कहा कि ‘कोऑपरेटिव संवाद’ यात्रा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि पूर्वोत्तर राज्य सहयोग, संवाद और सामूहिक प्रयासों के साथ आगे बढ़ें, तो कोई भी चुनौती असंभव नहीं है। उन्होंने कहा कि एनईएससीयूएफ पूर्वोत्तर के सहकारी संस्थानों के बीच एकता का मजबूत सेतु बनकर उभर रहा है।
डॉ. राई ने अंतरराज्यीय अध्ययन विनिमय कार्यक्रम, संयुक्त प्रशिक्षण पहल, क्षमता निर्माण, डिजिटल सहकारी विकास, बाजार संपर्क, युवा भागीदारी और महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों के माध्यम से सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर भारत में सहकारी आंदोलन का भविष्य उज्ज्वल है और इसकी सफलता एकता, पारदर्शिता, नवाचार और टीम भावना पर निर्भर करेगी।
वहीं, राई ने सिक्किम में सहकारी आंदोलन को मजबूत करने के लिए सिक्किम स्टेट कोऑपरेटिव यूनियन द्वारा चलाए जा रहे सहकारी शिक्षा, जागरूकता, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की भी जानकारी दी। उन्होंने मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग गोले के नेतृत्व में सिक्किम सरकार द्वारा सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने डेयरी किसानों के लिए दूध मूल्य में प्रोत्साहन, बेहतर प्रदर्शन करने वाली सहकारी समितियों को पुरस्कार और ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने के लिए विभिन्न सहायता उपायों की जानकारी दी।
कार्यक्रम में मिजोरम स्टेट कोऑपरेटिव यूनियन के सीईओ पु रुआतफेला ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि सहकारी आंदोलन केवल संस्थानों, कार्यालयों या नीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों, विश्वास और मुश्किल समय में एक साथ खड़े होने की भावना से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और भौगोलिक रूप से विविध पूर्वोत्तर क्षेत्र में सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन और समावेशी विकास के लिए सहकारिता अत्यंत आवश्यक है।
अरुणाचल प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव यूनियन के अध्यक्ष और एनईएससीयूएफ के सहायक मुख्य समन्वयक नबाम ताही नेकिल ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों में सहकारी आंदोलन की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर अपने विचार रखे। उनके साथ, मिजोरम स्टेट कोऑपरेटिव यूनियन के अध्यक्ष के लालछमरेइया ने मिजोरम में सहकारी संस्थानों की गतिविधियों और उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने राज्य में सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर भी प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में मिजोरम स्टेट कोऑपरेटिव यूनियन द्वारा एक रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुति भी हुई। इसमें मिजोरम की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं की झलक देखने को मिली। प्रसिद्ध मिजो गायिका मरीना वानह्रियातपुई वार्टे की प्रस्तुति ने कार्यक्रम को और भी जीवंत बना दिया।
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