नई दिल्ली । विपक्षी दलों के कई सांसदों के पाला बदलकर एनडीए का समर्थन करने की खबरों के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी सांसद को किसी एक दल या गठबंधन से बंधकर रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। रिजिजू ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को अपने विवेक और समझ के आधार पर राजनीतिक फैसला लेने का पूरा अधिकार है।
न्यूज 18 इंडिया के एक कार्यक्रम में किरेन रिजिजू ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक परिस्थितियां बदलती रहती हैं। उन्होंने कहा, लोकतंत्र में कुछ भी तय नहीं होता। कोई चुनाव जीतता है, कोई इधर-उधर जाता है। यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे रोका नहीं जा सकता।
रिजिजू ने कहा कि भारत में न तो सैन्य शासन है और न ही तानाशाही। उन्होंने कहा, सांसद बच्चे नहीं हैं, वे अपनी समझ और विवेक से निर्णय लेते हैं। कोई उनके फैसले पर सवाल उठा सकता है, लेकिन किसी को उन्हें रोकने का अधिकार नहीं है।
रिजिजू का यह बयान ऐसे समय आया है, जब ऐसी खबरें सामने आई हैं कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 सांसदों ने नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी ऑफ इंडिया का दामन थामते हुए भाजपा नीत एनडीए को समर्थन दिया है। हालांकि, इस दावे पर संबंधित दलों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
इस बीच शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी में भी टूट कराने की कोशिश की जा रही है। राउत ने दावा किया कि बगावत से जुड़े प्रत्येक सांसद को कथित तौर पर 15-15 करोड़ रुपये दिए गए और उन्हें नांदेड़, पुणे समेत तीन स्थानों से चार्टर्ड विमानों के जरिए लाया गया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने संसदीय दल की बैठक के लिए व्हिप जारी किया है और अरविंद सावंत ने इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भी लिखा है।
संजय राउत के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि बीजेपी पैसे की राजनीति में विश्वास नहीं करती। उन्होंने कहा, हम अच्छी राजनीति और अच्छा काम करना चाहते हैं। जो लोग हमारे साथ जुड़ना चाहते हैं, उनका स्वागत है। रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बीजेपी अपने काम के दम पर लोगों का समर्थन हासिल करती है।
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