‘गिरगिटी’ से ममता का संदेश- स्वार्थ के लिए बदलती निष्ठा लोकतंत्र के लिए खतरा

कोलकाता । पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर बगावत के सुर तेज हो गए हैं। इस बीच पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने ‘गिरगिटी’ शीर्षक से एक नई कविता लिखी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस कविता के जरिए उन्होंने उन नेताओं को कड़ा संदेश दिया है जो हाल के दिनों में पार्टी की आलोचना कर रहे हैं।

ममता बनर्जी ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर यह कविता साझा की। इसमें उन्होंने उन लोगों पर निशाना साधा है जो निजी लाभ के लिए अपनी निष्ठा, विश्वास और स्थिति को बार-बार बदलते रहते हैं। उन्होंने ऐसे लोगों की तुलना गिरगिट से की है जो रंग बदलने के लिए जाना जाता है। पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी कविता में लिखा कि कुछ लोग ‘गिरगिट से भी ज्यादा खतरनाक होते हैं क्योंकि वे अपने वित्तीय हितों और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए कुछ ही घंटों में अपना चरित्र और वफादारी बदल लेते हैं। कविता में सवाल किया गया है, आप अपना चरित्र और कितना बदलना चाहते हैं? आपके चरणों में कितनी रिश्वत है? आप खुद को और कितना बदलना चाहते हैं?

राजनीतिक हलकों में इन पंक्तियों को उन नेताओं पर सीधा हमला माना जा रहा है जिन्होंने हाल ही में टीएमसी से दूरी बना ली है। यह कविता ऐसे समय में आई है जब पार्टी के कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं और संगठन के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। पिछले कुछ हफ्तों में कई नेताओं ने पार्टी के पदों से इस्तीफे भी दिए हैं।

ममता बनर्जी ने किसी का नाम लिए बिना सार्वजनिक जीवन में कृतज्ञता, नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनशीलता की कमी पर दुख जताया है। उन्होंने लिखा कि कुछ लोग हालात बदलते ही रिश्तों, विचारधाराओं और विश्वासों को अपनी सुविधा के अनुसार बदल लेते हैं। कविता में कहा गया है कि वफादारी और दुश्मनी अक्सर स्वार्थ से तय होती है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ऐसे लोग कभी अपने कार्यों पर आत्ममंथन करते हैं?

इससे पहले ममता बनर्जी ने ‘दखल’ (कब्जा) नाम की एक कविता लिखी थी, जिसने काफी चर्चा बटोरी थी। उस कविता को राज्य की नई भाजपा सरकार की आलोचना के रूप में देखा गया था। नई सरकार ने कोलकाता और कई जिलों में अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान शुरू किया है, जिसकी तुलना भाजपा शासित राज्यों की “बुलडोजर कार्रवाई” से की जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ‘गिरगिटी’ के माध्यम से ममता बनर्जी ने कविता को एक राजनीतिक संदेश देने के माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया है। टीएमसी इस समय चुनावी हार के बाद संगठनात्मक चुनौतियों और दलबदल की समस्या से जूझ रही है।

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