नई दिल्ली । पश्चिम एशिया संकट और अल-निनो प्रभाव के चलते खेती-बाड़ी को झटका लगने और महंगाई बढ़ने के जोखिम को देखते हुए कृषि मंत्रालय किसानों को सपोर्ट देने की तैयारी में जुट गया है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को कहा कि अभी मौसम विभाग का अंतिम अनुमान नहीं आया है, लेकिन अल निनो से फसलों पर कोई बुरा असर न पड़े, इसको लेकर पूरी तैयारी की जा रही है।
चौहान ने यहां दो दिवसीय राष्ट्रीय खरीफ सम्मेलन के दौरान कहा, अल निनो से घबरने की जरूरत नहीं है। मौसम विभाग से कोई अंतिम अनुमान नहीं आया है, फिलहाल केवल अटकलें हैं। चौहान ने कहा, हालांकि हम यह देख रहे हैं कि जिन जिलों में ज्यादा प्रभाव पड़ सकता है, उनमें कौन सी वैकल्पिक फसलें हो सकती हैं। उन फसलों के मुताबिक बीजों की व्यवस्था की जाएगी। अगर तापमान ज्यादा बढ़ता है और बीच में बारिश में लंबा गैप आता है, तो इसको लेकर आपात योजना भी तैयार कर रहे हैं। चौहान ने कहा, जैसी परिस्थिति होगी और जिस राज्य को जैसी आवश्यकता होगी, उसी के अनुसार काम करेंगे।
खरीफ सीजन के लिए बुआई जून के दूसरे हफ्ते से शुरू होने लगती है। मौसम विभाग ने 13 अप्रैल को अपने पहले अनुमान में कहा था कि इस साल मॉनसूनी बारिश सामान्य से कम रह सकती है और यह लॉन्ग पीरियड ऐवरेज के 92 प्रतिशत करीब रह सकती है। वहीं, विश्व मौसम विभाग और अमेरिका के नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फियरिक एडमिनिस्ट्रेशन ने कहा है कि मई से जुलाई के बीच अल-निनो पैटर्न जोर पकड़ सकता है।
स्मॉलकेस मैनेजर और थॉटफुल इनवेस्टर्स रिसर्च एलएलपी के फाउंडर तपन दोशी ने कहा, ‘धान, दलहन, गन्ना, सोयाबीन और तिलहन मॉनसून आधारित फसलों की खेती वाले राज्यों में बारिश का पैटर्न असमान रहा और इसमें देर-सबेर हुई तो बड़ा असर दिख सकता है। इससे खाद्यान्न उपलब्धता पर भी आंच आ सकती है। बारिश अगर मॉनसून के पीक सीजन में सामान्य से कम रही, तो इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में महंगाई में बड़ा उछाल आ सकता है।’
चौहान ने हालांकि कहा कि जून तक के 2025-26 फसल वर्ष में रेकॉर्ड 37.66 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का अनुमान है, जो पिछले साल से 1.88 करोड़ टन ज्यादा रहेगा। उन्होंने कहा, दुनिया में कितना भी बड़ा संकट आ जाए, भारत में कोई भूखा नहीं रहेगा। हमारे अन्न भंडार भरे हुए हैं, इसलिए चिंता की कोई जरूरत नहीं है।
देश में बुआई रकबे का करीब 55 प्रतिशत हिस्सा सिंचाई के लिए बारिश पर निर्भर रहता है। ऐसे में फसलों की उपज, फूड सप्लाई चेंस और ग्रामीण इलाकों में आमदनी के लिहाज से बारिश का पैटर्न अहम हो जाता है। देश के जीडीपी में खेती का योगदान 15-16 प्रतिशत है और लगभग 45 प्रतिशत आबादी की आजीविका इस पर निर्भर है। ऐसे में मॉनसून का प्रभाव कंपनियों की कमाई पर भी पड़ता है।
खुदरा महंगाई दर मार्च के 3.4 प्रतिशत से बढ़कर अप्रैल में 3.48 प्रतिशत हो गई थी। वहीं, थोक महंगाई दर 8.3 प्रतिशत के साथ 42 महीनों के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थी। खाने-पीने की चीजों का कंस्यूमर प्राइस इंडेक्स में करीब 40 प्रतिशत वेटेज होने के चलते इनकी कीमतों में बढ़ोतरी का खुदरा महंगाई दर पर बड़ा असर दिखता है। इस बीच, पश्चिम एशिया संकट के चलते पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए जाने के बाद अब मई में महंगाई दर में उछाल आना तय है।
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