एचएलएसजीएमसी में शुरू हुआ डॉक्टरों की नई पीढ़ी का सफर

अब डॉक्टर बनने के लिए सिक्किम से बाहर जाने की जरूरत नहीं : प्रेम सिंह तमांग

अनुशासन और करुणा के साथ बनें चिकित्सक : राज्यपाल

गंगटोक : सिक्किम के पहले सरकारी मेडिकल कॉलेज Helen Lepcha State Government Medical College (HLSGMC)  के प्रथम बैच के 80 एमबीबीएस विद्यार्थियों की व्हाइट कोट सेरेमनी शुक्रवार को मनन केंद्र में आयोजित हुई। राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर और मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग की उपस्थिति में आयोजित समारोह में विद्यार्थियों को व्हाइट कोट पहनाया गया और उन्हें चिकित्सा सेवा की शपथ दिलाई गई।

समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने मेडिकल कॉलेज की स्थापना को सिक्किम और राज्य के विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने प्रथम बैच के विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनसे कड़ी मेहनत, अध्ययन के प्रति समर्पण और उपलब्ध अवसरों का पूरा लाभ उठाने का आग्रह किया। उन्होंने मेडिकल कॉलेज की स्थापना में मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, अधिकारियों, चिकित्सकों, शिक्षकों, इंजीनियरों और अन्य लोगों के योगदान की सराहना की।

राज्यपाल ने कहा कि मेडिकल कॉलेज की स्थापना से न केवल चिकित्सा शिक्षा के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासन, करुणा और जिम्मेदारी की भावना के साथ चिकित्सा शिक्षा हासिल करने तथा लोगों की सेवा के लिए समर्पित रहने का आह्वान किया। उन्होंने विद्यार्थियों के अभिभावकों को भी बधाई देते हुए कहा कि उनके सहयोग और प्रोत्साहन से विद्यार्थी इस मुकाम तक पहुंचे हैं।

मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने भी सिक्किम में चिकित्सा शिक्षा के नए अध्याय की शुरुआत पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताया, जिन्होंने इस वर्ष मेडिकल कॉलेज का वर्चुअल उद्घाटन किया था। मुख्यमंत्री ने एचएलएसजीएमसी में प्रवेश पाने वाले 80 विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को बधाई देते हुए कहा कि अब सिक्किम के विद्यार्थियों को डॉक्टर बनने के लिए मेडिकल शिक्षा हासिल करने राज्य से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं होगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने एचएलएसजीएमसी में कुल 100 एमबीबीएस सीटों को मंजूरी दी है। इनमें 50 सीटें निशुल्क हैं, 30 सीटें फुल-पेमेंट श्रेणी में हैं, जिनकी वार्षिक फीस पांच लाख रुपये है। इसके अलावा 15 सीटें सेंट्रल पूल और पांच सीटें मैनेजमेंट कोटा के तहत हैं। उन्होंने बताया कि सिक्किम देश का पहला राज्य है, जिसे एक ही आवंटन में सभी 100 एमबीबीएस सीटों की मंजूरी मिली है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सिक्किम मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसएमआईएमएस) में भी राज्य के विद्यार्थियों के लिए 30 अतिरिक्त एमबीबीएस सीटें हासिल की गई हैं। इनमें 20 रियायती और 10 फुल-पेमेंट सीटें हैं। इस तरह इस वर्ष एचएलएसजीएमसी के 80 और एसएमआईएमएस के 30 विद्यार्थियों सहित राज्य में कुल 110 विद्यार्थियों को एमबीबीएस सीट मिली है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के 19 विद्यार्थियों को सिक्किम से बाहर एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए पूर्ण वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई है। इसके अलावा एचएलएसजीएमसी में पढ़ने वाले उन विद्यार्थियों को मुख्यमंत्री शिक्षा सहायता योजना के तहत छात्रावास खर्च के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है, जो स्वयं इसका खर्च वहन करने में सक्षम नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने सरकारी स्कूलों से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के नीट में सफल होने का भी उल्लेख किया। उन्होंने राज्य के विभिन्न वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों की सफलता के लिए शिक्षकों और संकाय सदस्यों के योगदान की सराहना की। उन्होंने विद्यार्थियों से आर्थिक अथवा अन्य कठिनाइयों के कारण पढ़ाई नहीं छोड़ने की अपील करते हुए सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि एचएलएसजीएमसी की स्थापना पर कुल 762.24 करोड़ रुपये की लागत आई है। इसमें भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से 225 करोड़ रुपये, पीएम-डेवआईएनई के माध्यम से 167.90 करोड़ रुपये और राज्य योजना के तहत 184.48 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। शेष 184.86 करोड़ रुपये आगामी उन्नयन और संबंधित कार्यों के लिए निर्धारित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि कॉलेज में प्रवेश के लिए पात्रता और मेरिट के आधार पर सीटों का आवंटन किया गया है। विद्यार्थियों के बीच किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया गया तथा पारदर्शी प्रक्रिया के साथ रोस्टर प्रणाली का पालन किया गया है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जीटी ढुंगेल ने प्रथम बैच के विद्यार्थियों को बधाई देते हुए व्हाइट कोट समारोह को सिक्किम के लिए ऐतिहासिक अवसर बताया। उन्होंने विद्यार्थियों से चिकित्सा शिक्षा के कठिन वर्षों में मेहनत, धैर्य और समर्पण के साथ आगे बढ़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा को केवल करियर के रूप में नहीं, बल्कि सेवा के उद्देश्य से अपनाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से मरीजों को केवल एक केस या संख्या के रूप में नहीं, बल्कि परिवार और भावनाओं से जुड़े व्यक्ति के रूप में देखने तथा उनके प्रति संवेदनशील रहने की अपील की।

मुख्य सचिव आर. तेलंग ने कहा कि प्रथम बैच के विद्यार्थी संस्थान की संस्कृति, मानकों और परंपराओं को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने विद्यार्थियों से विनम्रता और जिज्ञासा के साथ शिक्षा हासिल करने तथा चिकित्सा के मूल उद्देश्य मानव सेवा को हमेशा ध्यान में रखने का आग्रह किया। एचएलएसजीएमसी के डीन डॉ बिक्रम खड़गा ने कॉलेज की स्थापना को लंबे समय से देखे जा रहे सपने की पूर्ति बताया। उन्होंने प्रथम बैच के विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए अनुशासन, जिज्ञासा, ईमानदारी और उत्साह के साथ चिकित्सा शिक्षा हासिल करने की अपील की। उन्होंने कॉलेज के मार्गदर्शक आदर्श वाक्य ‘लर्निंग, हीलिंग एंड सर्विंग’ का उल्लेख किया।

व्हाइट कोट समारोह के दौरान विद्यार्थियों ने चिकित्सा पेशे में व्यावसायिकता, जिम्मेदारी, करुणा और नैतिक आचरण के प्रतीक के रूप में व्हाइट कोट धारण किया। इसके बाद डीन ने विद्यार्थियों को शपथ दिलाई। समारोह में स्वतंत्रता सेनानी हेलन लेप्चा के परिवार को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने एचएलएसजीएमसी के लोगो और वेबसाइट का शुभारंभ किया। जन सेवा भवन, लुमसे के सफल निर्माण में योगदान देने वाले भवन एवं आवास विभाग के इंजीनियरों तथा संबंधित ठेकेदार को भी सम्मानित किया गया। वहीं एसटीएनएम अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग द्वारा लगातार सर्वाधिक कार्डियक इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी स्टडी और रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन प्रक्रियाएं किए जाने के लिए एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स का प्रमाणपत्र और पदक भी जारी किया गया। धन्यवाद ज्ञापन मेडिकल एजुकेशन की प्रधान निदेशक डॉ छिरिंग पेमा भूटिया ने किया, जबकि स्वागत भाषण स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव छेवांग ग्याछो भूटिया ने दिया।

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