दार्जिलिंग : उत्तर बंगाल में रोमांच और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक नया पर्यटन स्थल खुलने जा रहा है। जलपाईगुड़ी के गोरुमारा वन्यजीव प्रभाग के अंतर्गत कालिम्पोंग जिले के नेवड़ा वैली नेशनल पार्क में स्थित राचेला चोटी तक जाने वाला ट्रेकिंग मार्ग नवम्बर में पर्यटकों के लिए खोलने की तैयारी है। करीब 10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित इस चोटी से कंचनजंघा पर्वतमाला, सिक्किम की ओर फैला हिमालयी भू-दृश्य और प्रसिद्ध ‘स्लीपिंग बुद्धा’ की आकृति का विहंगम नजारा देखने को मिलेगा। मौसम साफ रहने पर यहां से सूर्योदय का दृश्य भी पर्यटकों के लिए खास आकर्षण होगा।
गोरुमारा के अतिरिक्त मंडलीय वनाधिकारी राजीव दे ने बताया कि राचेला चोटी से सूर्योदय देखने और कंचनजंघा पर्वतमाला के दर्शन के लिए बेहतर नजारा मिलता है। उनके अनुसार, यह अनुभव लोकप्रिय टाइगर हिल से भी अधिक आकर्षक हो सकता है। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, दिसंबर और जनवरी में में बर्फबारी होने पर यहां की ट्रेकिंग और भी रोमांचक हो सकती है। हालांकि, इस दौरान तापमान काफी नीचे गिरने की संभावना को देखते हुए पर्यटकों को कड़ाके की ठंड से निपटने की पूरी तैयारी के साथ आना होगा। राचेला चोटी तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को लावा स्थित नेवड़ा वैली नेशनल पार्क के प्रवेश द्वार से टिकट लेना होगा। इसके बाद वाहन से राचेला चोटी और चौदह फेरी की ओर जाने वाले मार्ग पर आगे बढ़ा जा सकेगा।
करीब आठ किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद दुमुखा में पहाड़ी सड़क के दो हिस्सों में बंटने वाले स्थान पर वाहन छोड़ना होगा। यहां से राचेला चोटी तक पहुंचने के लिए दो किलोमीटर से कुछ अधिक दूरी पैदल तय करनी होगी। घने जंगलों के बीच से गुजरने वाला यह रास्ता अपने प्राकृतिक सौंदर्य और कई मनोरम पड़ावों के कारण ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए खास अनुभव साबित हो सकता है।
वन विभाग ने राचेला में वॉचटावर का निर्माण करीब दो साल पहले शुरू किया था। हालांकि, लगभग डेढ़ साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा वन प्रवेश शुल्क माफ किए जाने के बाद इस परियोजना का काम रोक दिया गया था। पर्यटकों की अनियंत्रित भीड़ बढ़ने की आशंका के कारण वन विभाग ने इस मार्ग को खोलने की योजना भी स्थगित कर दी थी। राजीव दे के अनुसार, वॉचटावर का शेष निर्माण कार्य नवम्बर की शुरुआत तक पूरा होने की उम्मीद है। इसके लिए कंक्रीट के खंभों पर लकड़ी के तख्ते लगाए जाएंगे और ऊपर टिन की छत बनाई जाएगी।
राचेला तक जाने वाला ट्रेकिंग मार्ग घने वन क्षेत्र से होकर गुजरता है। वनकर्मियों के मुताबिक, रास्ते में कई खूबसूरत प्राकृतिक स्थल मिलेंगे। इस दौरान पर्यटकों को हिरण, हिमालयी काले भालू और दुर्लभ रेड पांडा जैसे वन्यजीवों को देखने का अवसर भी मिल सकता है। हालांकि, वन्यजीवों का दिखना उनकी प्राकृतिक गतिविधियों और परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
वन पारिस्थितिकी की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए विभाग इस मार्ग पर पर्यटकों की संख्या सीमित रखने की योजना बना रहा है। एक सूत्र के अनुसार, यहां जाने वाले वाहन चालकों को अनावश्यक हॉर्न बजाने से बचने और जरूरत न होने पर हेडलाइट का इस्तेमाल नहीं करने का निर्देश दिया जाएगा।
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