स्वच्छ और हरित जंगू के संकल्प के साथ आयोजित हुई ‘कबाड़ से जुगाड़’ प्रतियोगिता

जंगू : स्वच्छता ही सेवा अभियान 2026 के तहत उत्तर सिक्किम के जंगू स्थित पासिंगदांग प्रखंड प्रशासनिक केंद्र में शुक्रवार को ‘कबाड़ से जुगाड़’ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। सिक्किम ग्रामीण आजीविका मिशन (एसआरएलएम) के अंतर्गत जंगू प्रखंड विकास सोसाइटी (बीडीएस) की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने बेकार सामग्री से उपयोगी और आकर्षक वस्तुएं बनाकर अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, कचरा प्रबंधन, पुनर्चक्रण और ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा देना था। इस इवेंट में सरकारी अधिकारी, एसएचजी सदस्य, वित्तीय साक्षरता प्रतिनिधि और सामुदायिक हितधारकम्एक साथ आए ताकि Dzongu में पर्यावरण बचाने, महिलाओं को मजबूत करने और सस्टेनेबल ग्रामीण विकास के लिए मिलकर किए जा रहे कामों को मजबूत किया जा सके।

कार्यक्रम की अध्यक्षता बागवानी विभाग की चेयरपर्सन ओंगकित लेप्चा ने की। इस अवसर पर पासिंगदांग के प्रखंड विकास अधिकारी डॉ महिंद्र तमांग, राज्य ग्रामीण विकास संस्थान के जूनियर फैकल्टी सुरेन मोहरा, क्रिसिल, भारतीय स्टेट बैंक गंगटोक तथा वित्तीय साक्षरता से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित थे।

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण जंगू के स्वयं सहायता समूहों की ओर से प्रखंड विकास अधिकारी डॉ महिंद्र तमांग को पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक विकास में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया जाना रहा। उन्हें विशेष प्रशंसा पत्र प्रदान किया गया। बताया गया कि डॉ तमांग ने पर्यावरण को स्वच्छ रखने के उद्देश्य से स्वयं पहल करते हुए लगभग 18 किलोमीटर दूर तक कचरा पहुंचाने का कार्य किया। उनके इस प्रयास को जिम्मेदार नागरिकता और पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणादायक मिसाल बताया गया।

सम्मान पत्र में कहा गया कि सच्चे नेतृत्व की पहचान केवल पद से नहीं, बल्कि समाज के लिए किए गए कार्यों से होती है। डॉ तमांग की पहल ने यह संदेश दिया कि पहाड़ों, जंगलों और नदियों को स्वच्छ रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। इस कार्यक्रम ने पर्यावरण संरक्षण और गांव की रोजी-रोटी के बीच के कनेक्शन को भी मजबूत किया। एसएचजी को फेंके गए कचरे को बदलने के लिए बढ़ावा देकर बेकार चीज़ों को उपयोगी, सजावटी और बाजार में बिकने लायक उत्पादों में बदलकर, यह पहल कचरा प्रबंधन के लिए एक व्यावहारिक तरीका अपनाती है और साथ ही महिलाओं के लिए उद्यमिता के अवसर भी पैदा करती है।

एसएचजी सदस्यों ने उम्मीद जताई कि ऐसे प्रेरणादायक उदाहरण और लोगों को, खासकर युवाओं और सामुदायिक संस्थाओं को, जंगू को साफ-सुथरा और हरा-भरा रखने में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। वहीं, ‘क्रिएटिव रियूज़’ (रचनात्मक पुन: उपयोग) प्रतियोगिता ने एसएचजी को बेकार चीजों को उपयोगी और आकर्षक उत्पादों में बदलकर अपने कौशल, रचनात्मकता और कल्पनाशीलता को दिखाने के लिए प्रोत्साहित किया।

इससे पहले एसआरएलएम जंगू के प्रखंड परियोजना प्रबंधक रमेश छेत्री ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि बेकार समझी जाने वाली वस्तुओं को रचनात्मकता और नवाचार के माध्यम से उपयोगी उत्पादों में बदला जा सकता है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ महिलाओं के लिए आय के नए साधन भी विकसित हो सकते हैं। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों से उत्पादों की गुणवत्ता और डिजाइन में सुधार कर बाजार की संभावनाएं तलाशने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में कचरे को कम करने, दोबारा उपयोग करने और पुनर्चक्रण के सिद्धांतों पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही महिलाओं को वित्तीय साक्षरता, बैंकिंग सुविधाओं और उद्यमिता से जुड़ी जानकारियां भी दी गईं। अंत में बीडीएस जंगू की प्रबंधक पेमकित लेप्चा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर ग्रामीण समाज के निर्माण के लिए सरकारी संस्थाओं तथा स्थानीय समुदाय का सामूहिक प्रयास आवश्यक है। कार्यक्रम का समापन जंगू को स्वच्छ, हरित और आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प के साथ हुआ। उन्होंने अध्यक्ष डॉ. महेंद्र तमांग, सुरेन मोहरा, संस्थागत प्रतिनिधियों, क्रिसिल प्रतिनिधियों, फाइनेंशियल लिटरेसी काउंसलर, एसबीआई प्रतिनिधियों, एसआरएलएम अधिकारियों, बीडीएस स्टाफ और सभी भाग लेने वाले एसएचजी सदस्यों का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने एसएचजी सदस्यों द्वारा दिखाए गए उत्साह और रचनात्मकता की भी तारीफ़ की और उन्हें ऐसी पहलों में भाग लेते रहने के लिए प्रोत्साहित किया जो पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी, वित्तीय जागरुकता और टिकाऊ आजीविका को बढ़ावा देती हैं। उन्होंने फिर से कहा कि एसएचजी को मजबूत करने और एक ज्यादा आत्मनिर्भर व पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार समाज बनाने के लिए सामूहिक प्रयास, संस्थागत तालमेल और समुदाय की भागीदारी जरूरी है। यह कार्यक्रम पर्यावरण की स्थिरता को बढ़ावा देने, एसएचजी के बीच इनोवेशन को प्रोत्साहित करने, वित्तीय साक्षरता को मजबूत करने और ग्रामीण महिलाओं के लिए नए अवसर पैदा करने के नए संकल्प के साथ संपन्न हुआ।

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