गंगटोक : सुशासन और ग्रामीण विकास कार्यक्रमों में जनसेवा की बेहतर व्यवस्था को लेकर सिक्किम राज्य ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (एसआईआरडी एवं पीआर) की ओर से कारफेक्टार में पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। 5 से 9 अक्टूबर तक चले तीसरे चरण के इस प्रशिक्षण में सोरेंग जिले के कलुक, मंगलबारिया और बैगुने प्रखंडों के कुल 91 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाना, कार्यकुशलता बढ़ाना और ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाना था। इसमें निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों, सहायक निदेशकों, ग्राम प्रशासनिक सहायकों, कार्यालय कर्मचारियों तथा विभिन्न ग्रामीण विकास योजनाओं से जुड़े अधिकारियों और कर्मियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को सुशासन के सिद्धांतों, प्रशासनिक पारदर्शिता, जवाबदेही, कार्यालय प्रबंधन, स्थानीय राजस्व सृजन, संविधान की 11वीं अनुसूची के अंतर्गत आने वाले 29 विषयों, नागरिक चार्टर, अभिलेख प्रबंधन और ग्रामीण विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की जानकारी दी गई।
एसआईआरडी एवं पीआर निदेशक बिशाल मुखिया के मार्गदर्शन में आयोजित प्रशिक्षण का संचालन उपनिदेशक डॉ तारा शर्मा ने पाठ्यक्रम निदेशक के रूप में किया। विभिन्न सत्रों में सुभाष राई, दिल माया राई, बिकाश हिंगमांग, टीका माया प्रधान, अरविंद थापा, मुकेश दहाल और केशर राई ने प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।
विशेष सत्र में तांजी-बिकमत ग्राम पंचायत इकाई के पंचायत अध्यक्ष अर्जुन कुमार राई ने स्थानीय प्रशासन, संसाधन जुटाने और जनसेवाओं को प्रभावी बनाने के अपने अनुभव साझा किए। प्रतिभागियों को जोरथांग प्रखंड के पोकलोक ग्राम पंचायत केंद्र का शैक्षणिक भ्रमण भी कराया गया।
प्रशिक्षण के अंतिम दिन समूह प्रस्तुतियों, विचार-विमर्श और मूल्यांकन के माध्यम से प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए। साथ ही ग्रामीण प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए कार्ययोजनाएं तैयार की गईं।
आयोजकों के अनुसार, इस प्रशिक्षण से पंचायत संस्थाओं और ग्रामीण विकास कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने तथा आम नागरिकों तक सरकारी सेवाएं अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में मदद मिलेगी।
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