गुवाहाटी । असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने चुनाव आयोग को लेकर चल रहे विवाद के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी से माफी मांगने को कहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के बयानों से लोगों के मन में भ्रम पैदा हुआ। सरमा ने कहा कि कांग्रेस को बार-बार चुनाव में हार मिलने के कारणों पर आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हार के बाद चुनाव आयोग और ईवीएम पर सवाल उठाने के बजाय पार्टी को यह देखना चाहिए कि जनता उसे क्यों नकार रही है। सीएम हिमंत सरमा ने कहा कि 2014 में कांग्रेस उस समय भी चुनाव हारी थी, जब चुनाव आयोग मनमोहन सिंह की नियुक्ति वाला था।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत सरमा ने कहा कि चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर से जुड़े फैसले पूरे आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए थे। फैसले आयोग के सभी सदस्यों की सहमति से हुए थे, तो फिर राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर अकेले फैसले लेने के आरोप क्यों लगाए? उन्हें माफी मांगनी चाहिए।
बताते चलें कि यह विवाद एक मीडिया रिपोर्ट के सामने आने के बाद शुरू हुआ है। दरअसल, रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एसआईआर से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं पर कई बार आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने 10 महीने में कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कीं। चुनाव आयोग ने इन आरोपों के जवाब में कहा कि एसआईआर से जुड़े फैसले आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से लिए गए थे।
विपक्षी दलों ने रिपोर्ट के आधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। कांग्रेस, माकपा, भाकपा, तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव) ने आयोग के खिलाफ सवाल उठाए हैं।
रिपोर्ट सामने आने के बाद राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर चुनाव में ‘मैच फिक्सिंग’ करने का आरोप लगाया था। विपक्षी दलों ने भी आयोग के कामकाज पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। वहीं, चुनाव आयोग ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि एसआईआर से जुड़े कार्यक्रम के सभी फैसले आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से लिए गए थे और प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार की गई।
आगामी विपक्षी गठबंधन की बैठक पर भी मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने निशाना साधा। उन्होंने इसे ‘हारे और निराश लोगों का गठबंधन’ बताया और कहा कि इसका एकमात्र उद्देश्य देश के लोकतंत्र को कमजोर करना है। सरमा ने कहा कि इस बैठक का जनता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, ये बातें हिमंत सरमा का राजनीतिक बयान हैं; खबर में विपक्षी गठबंधन की बैठक के संभावित फैसलों या उसके प्रभाव को लेकर कोई स्वतंत्र आकलन नहीं किया गया है।
इस बीच इंडी गठबंधन की बैठक पर टीएमसी विधायक सोवनदेब चट्टोपाध्याय ने कहा कि ऐसी बैठक होनी ही चाहिए; यह जरूरी है और इसका असर हर राज्य में दिखना चाहिए। तभी ये लोग डरेंगे।
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