गंगटोक : सोरेंग जिले के निवासी सीपी शर्मा ने कहा है कि दार्जिलिंग के गोरखा समुदाय की अलग राज्य गोरखालैंड की मांग जायज और न्यायोचित है, लेकिन सिक्किम और दार्जिलिंग के विलय की बात किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि गोरखालैंड के मुद्दे का समाधान केंद्र सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार को मिलकर निकालना चाहिए तथा इसके लिए सिक्किम की सीमा के भीतर किसी प्रकार का समाधान तलाशना पूरी तरह गलत होगा।
एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए शर्मा ने कहा कि सिक्किम और दार्जिलिंग को एक करने या विलय की बात केवल एक अनावश्यक और असंभव विवाद को जन्म देती है। उन्होंने कहा, हम सिक्किमवासी बार-बार स्पष्ट कर चुके हैं कि हम विलय के पक्ष में कभी नहीं थे और आज भी नहीं हैं। इसके बावजूद हमारे शांत और सुंदर राज्य को बार-बार अशांत करने का प्रयास क्यों किया जाता है, इस पर सभी को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दार्जिलिंग के गोरखा भाई-बहनों द्वारा भारतीय संविधान के दायरे में रहकर अलग राज्य गोरखालैंड की मांग करना पूरी तरह जायज है। वर्तमान सिक्किम सरकार और सिक्किम की जनता उनकी भावना और मांग के प्रति समर्थन और विश्वास रखती है। हालांकि, गोरखालैंड की मांग को सिक्किम के साथ विलय से जोड़ना किसी भी तरह उचित नहीं है।
शर्मा ने कहा कि दार्जिलिंग के लोगों के पूर्वजों और नेताओं ने सिक्किम में विलय के लिए वर्षों तक संघर्ष नहीं किया है, बल्कि उनकी लड़ाई अपनी अलग पहचान और अलग राज्य के लिए है। ऐसे में विलय की बात न तो दार्जिलिंग के आंदोलन के साथ न्याय करेगी और न ही सिक्किम के हित में होगी। उन्होंने कहा कि गोरखालैंड के मुद्दे का समाधान केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार को मिलकर करना चाहिए।
सीपी शर्मा ने सिक्किम को प्राप्त संवैधानिक सुरक्षा अनुच्छेद 371एफ को सिक्किम और सिक्किमवासियों के लिए जीवन-मरण का विषय बताते हुए कहा कि यह राज्य के अधिकारों और विशेष संवैधानिक प्रावधानों का कवच है। उन्होंने कहा कि सिक्किम में किसी अन्य क्षेत्र को मिलाने अथवा सीमा में किसी प्रकार के बदलाव का प्रयास सीधे तौर पर इन संवैधानिक अधिकारों को प्रभावित कर सकता है। इसलिए सिक्किम के अलग अस्तित्व और सुरक्षा की दृष्टि से भी विलय किसी भी परिस्थिति में संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने इस विषय पर शुरू से ही स्पष्ट और दृढ़ रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक मंचों से साफ कहा है कि सिक्किम और दार्जिलिंग का विलय असंभव है और यह कभी भी, किसी परिस्थिति में नहीं होगा। शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने जहां दार्जिलिंग के लोगों की गोरखालैंड की मांग के प्रति नैतिक समर्थन व्यक्त किया है, वहीं सिक्किम के अनुच्छेद 371एफ और सिक्किमवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए भी मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री के इस रुख को सिक्किम और सिक्किमवासियों के हित में बताया।
विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए शर्मा ने कहा कि जब सरकार पहले ही विलय की संभावना को स्पष्ट रूप से खारिज कर चुकी है, तब विपक्षी नेताओं द्वारा इस मुद्दे को लेकर लोगों के बीच भ्रम पैदा करना समझ से परे है। उन्होंने कहा कि जो बात संभव ही नहीं है, उसे लेकर लोगों को डराने और दिग्भ्रमित करने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे मुद्दों को उठाकर शांत सिक्किम में राजनीतिक अशांति पैदा करने की कोशिश की जा रही है।
शर्मा ने कहा कि सिक्किम और दार्जिलिंग के लोगों के बीच भाईचारे का रिश्ता है और सिक्किम के लोग दार्जिलिंग के लोगों की गोरखालैंड की मांग का समर्थन करते हैं। लेकिन सिक्किम में विलय की बात न कल संभव थी, न आज है और न भविष्य में होगी। उन्होंने कहा कि जब भी गोरखालैंड का मुद्दा उठता है, किसी न किसी रूप में सिक्किम को उसमें जोड़ने की कोशिश होती है, जो सिक्किमवासियों के हित में नहीं है। उन्होंने दार्जिलिंग के लोगों से आग्रह किया कि वे अपनी मांग पर कायम रहते हुए सिक्किम को इस मुद्दे में न जोड़ें और न ही सिक्किम को इसमें घसीटें।
सीपी शर्मा ने कहा, हम मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग के स्पष्ट रुख के साथ खड़े हैं और सिक्किम के विलय के पक्ष में कदापि नहीं हैं। सिक्किम की शांति, अलग पहचान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
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