बच्चों के प्रति संवेदनशील हो न्याय व्यवस्था : मुख्य न्यायाधीश
नामची : सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग और सिक्किम उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए मुहम्मद मुस्ताक ने सोमवार को नामची कोर्ट परिसर में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायालय का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। दोनों ने नए न्यायालय की स्थापना को नामची और आसपास के क्षेत्रों में न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने तथा आम लोगों के लिए न्याय तक पहुंच आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने कहा कि सुलभ, संवेदनशील और प्रभावी न्याय व्यवस्था कानून के शासन के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत करने के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को निष्पक्ष और समयबद्ध न्याय मिलना सुशासन का महत्वपूर्ण आधार है। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के लिए सरकारी तथा न्यायिक संस्थानों को अधिक सुलभ और जनोन्मुखी बनाने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि विभिन्न अनुमंडल स्तरों पर न्यायालयों की स्थापना होने से लोगों को कानूनी सहायता और न्याय पाने के लिए लंबी दूरी तय करने की परेशानी कम होगी।
मुख्यमंत्री ने राज्य में न्याय व्यवस्था को मजबूत करने में मुख्य न्यायाधीश के मार्गदर्शन और सहयोग की सराहना की। उन्होंने न्यायिक नियुक्तियों से जुड़े नियम 4/4 के तहत किए गए सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य पात्र सिक्किमी उम्मीदवारों को निष्पक्ष अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने सोरेंग और पाकिम जैसे नए जिलों के गठन का भी जिक्र किया और कहा कि इससे प्रशासन, आवश्यक सरकारी सेवाएं तथा विकास योजनाएं लोगों के और करीब पहुंची हैं। उन्होंने इसे विकेंद्रीकरण और जनकेंद्रित शासन की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
मुख्यमंत्री ने अतिरिक्त न्यायालय की स्थापना में सहयोग देने के लिए सिक्किम उच्च न्यायालय, जिला एवं सत्र न्यायालय नामची, कानून विभाग, भवन एवं आवास विभाग तथा संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी। उन्होंने विश्वास जताया कि नया न्यायालय निष्पक्षता, गरिमा और दक्षता के साथ लोगों की सेवा करेगा।
इस अवसर पर मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए मुहम्मद मुस्ताक ने कम समय में न्यायालय की स्थापना के लिए राज्य सरकार और मुख्यमंत्री के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि इससे नामची और आसपास के लोगों के लिए न्याय प्राप्त करना अधिक सुविधाजनक होगा। उन्होंने सिक्किम में अलग बार काउंसिल स्थापित किए जाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में प्रस्ताव आगे बढ़ाया जाएगा और इससे राज्य में वकालत के पेशे तथा अधिवक्ताओं के कल्याण को मजबूती मिलेगी।
मुस्ताक ने बच्चों और युवाओं से संबंधित बढ़ते पॉक्सो मामलों, नशे की समस्या और अन्य सामाजिक चुनौतियों पर चिंता जताई। उन्होंने स्कूल और सामुदायिक स्तर पर बाल सुरक्षा, नशामुक्ति और आत्महत्या की रोकथाम से संबंधित उम्र के अनुरूप जागरुकता कार्यक्रम चलाने की आवश्यकता बताई।मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्याय व्यवस्था को बच्चों की परिस्थितियों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। किसी अपराध में माता-पिता के दोषी पाए जाने या जेल जाने की स्थिति में उसके दुष्परिणाम बच्चों को नहीं भुगतने पड़ने चाहिए। ऐसे बच्चों और किशोरों के लिए उचित संरक्षण, देखभाल और सहायता की व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने विद्यालयों में परामर्श और भावनात्मक सहयोग सेवाओं को मजबूत करने के साथ न्यायपालिका, शिक्षा विभाग, पुलिस तथा अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
समारोह में उपस्थित कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री राजू बस्नेत ने कहा कि अतिरिक्त न्यायालय से मौजूदा न्यायालयों पर मामलों का दबाव कम होगा और लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे में मदद मिलेगी। उन्होंने बच्चों के अधिकारों, सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श की जानकारी तथा निवारक परामर्श के लिए शिक्षा, समाज कल्याण और महिला, बाल, वरिष्ठ नागरिक एवं दिव्यांगजन कल्याण विभाग के समन्वित प्रयासों को जरूरी बताया।
कार्यक्रम में सिक्किम राज्य मानवाधिकार आयोग की अध्यक्ष एवं पटना उच्च न्यायालय की पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राई, विधायक सतीश चंद्र राई, विधायक संजीत खरेल, सिक्किम उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल कर्मा वांगचुक भूटिया, विधि सचिव सूरज छेत्री, नामची की जिला कलेक्टर अनुपा तामलिंग, एसएसपी सोनम डोमा भूटिया सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।
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