गंगटोक : सिक्किम सरकार के कौशल विकास विभाग के नियुक्ति केंद्र की ओर से सोमवार को सोकेथांग स्थित कौशल विकास विभाग के कॉन्फ्रेंस हॉल में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना पर जागरूकता-सह-संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य एमएसएमई को योजना के लाभ, अप्रेंटिस नियुक्त करने की प्रक्रिया तथा अप्रेंटिसशिप पोर्टल पर पंजीकरण एवं ऑनबोर्डिंग की जानकारी देना था।
कार्यक्रम में कौशल विकास विभाग की सचिव ताशी छो छो, एमएसएमई निदेशक एम रवि कुमार, आईएफएस, एसआईसीबी के प्रधान निदेशक-सह-मुख्य प्रशासक बिशाल राई, एससीएस विशेष सचिव सामदुप भूटिया तथा नियुक्ति केंद्र की संयुक्त सचिव-सह-सीईओ सुषमा प्रधान सहित विभागीय अधिकारी और विभिन्न एमएसएमई के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान कौशल विकास विभाग के अधिकारियों ने पीएम-एनएपीएस के प्रमुख प्रावधानों और इसके क्रियान्वयन से संबंधित विस्तृत प्रस्तुति दी। एमएसएमई को अप्रेंटिसशिप पोर्टल पर प्रतिष्ठान का पंजीकरण, प्रोफाइल पूरा करने, अप्रेंटिस के लिए अवसर सृजित करने, अप्रेंटिसशिप अनुबंध करने तथा स्टाइपेंड से संबंधित प्रावधानों की जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को पोर्टल पर पंजीकरण की चरणबद्ध प्रक्रिया भी समझाई गई।
अधिकारियों ने कहा कि अप्रेंटिसशिप योजना के माध्यम से एमएसएमई युवाओं को व्यावहारिक एवं उद्योग आधारित प्रशिक्षण देने के साथ-साथ अपने संस्थानों के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार कर सकते हैं। योजना के तहत अप्रेंटिस को स्टाइपेंड से संबंधित सहायता का भी प्रावधान है। विभाग ने एमएसएमई से सक्रिय रूप से पोर्टल पर पंजीकरण कराने और अधिक से अधिक अप्रेंटिसशिप अवसर उपलब्ध कराने का आग्रह किया।
कार्यक्रम के संवाद सत्र में विभिन्न एमएसमएमई के प्रतिनिधियों ने अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण के क्रियान्वयन से जुड़े सवाल और सुझाव रखे। विभागीय अधिकारियों ने उनके सवालों का जवाब देते हुए पीएम-एनएपीएस के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नियुक्ति केंद्र के माध्यम से निरंतर सहयोग और सुविधा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
इस अवसर पर एमएसएमई निदेशक एम रवि कुमार ने कौशल विकास विभाग के प्रयासों की सराहना करते हुए पीएम-एनएपीएस को लेकर राज्य स्तर पर कार्यशाला आयोजित करने का सुझाव दिया। उन्होंने वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सहयोग से जिला स्तर पर भी एमएसएमई के लिए कार्यशालाएं आयोजित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
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