जलवायु न्याय पर सिक्किम हाईकोर्ट का स्वतः संज्ञान, चार संस्थाओं को नोटिस

गंगटोक : सिक्किम हाईकोर्ट ने पड़ोसी नेपाल में हाल में आई फ्लैश फ्लड से उत्पन्न गंभीर कठिनाइयों और उसके प्रभाव को देखते हुए राज्य में जलवायु न्याय के मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लिया है। हाईकोर्ट ने ‘इन री क्लाइमेटिक जस्टिस इन द स्टेट ऑफ सिक्किम’ शीर्षक से डब्ल्यूपी (पीआईएल) संख्या 11/2026 दर्ज किया है।

17 सितम्बर को मुख्य न्यायाधीश ए. मुहम्मद मुस्ताक और न्यायमूर्ति भास्कर राज प्रधान की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने कहा कि कार्यवाही मुख्य न्यायाधीश द्वारा तैयार किए गए एक नोट में दिए गए आधारों पर शुरू की गई है। अदालत ने मामले में सहायता के लिए अधिवक्ता सुधीर मिश्रा तथा वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. (श्रीमती) डोमा टी. भूटिया और टी. आर. बरफुंगपा को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है।

अदालत ने शुरुआत में उन आम लोगों और स्थानीय समुदायों की राय सुनने के महत्व पर जोर दिया, जो जलवायु संबंधी घटनाओं से प्रभावित हो सकते हैं। कोर्ट ने ऐसे लोगों के लिए सुलभ मंच उपलब्ध कराने का निर्देश दिया, ताकि वे अपनी चिंताएं, विचार और सुझाव सामने रख सकें। रजिस्ट्री को राज्य के सभी स्थानीय प्रिंट और डिजिटल मीडिया संस्थानों को कार्यवाही की प्रतियां भेजने का निर्देश दिया गया है, ताकि मामले को लेकर जनजागरूकता बढ़े और लोगों से सुझाव प्राप्त किए जा सकें। आम लोगों के सुझाव सिक्किम स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (एसएसएलएसए) के माध्यम से या सीधे हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार के समक्ष भेजे जा सकेंगे।

अदालत ने मामले में चार अन्य संस्थाओं को प्रतिवादी बनाने को आवश्यक माना है। इनमें सिक्किम स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी, सिक्किम सरकार का पावर डिपार्टमेंट, भारत सरकार का रेल मंत्रालय और नेशनल हाईवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) शामिल हैं। अदालत ने सभी को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान सिक्किम सरकार के पावर डिपार्टमेंट की ओर से सरकारी अधिवक्ता ने नोटिस स्वीकार कर लिया और औपचारिक तामील की प्रक्रिया से छूट दी। सिक्किम स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के लिए स्थायी अधिवक्ता नहीं होने के कारण रजिस्ट्री को आवश्यक प्रक्रिया शुल्क पूरा होने के बाद नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया।

भारत सरकार के रेल मंत्रालय की ओर से डिप्टी सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया ने नोटिस स्वीकार किया और औपचारिक तामील की प्रक्रिया से छूट दी। हाईकोर्ट ने एसएसएलएसए को एमिकस क्यूरी की सहायता करने का भी निर्देश दिया है। एसएसएलएसए राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से स्थानीय लोगों के विचार और आवश्यक सूचनाएं एकत्र करने में सहयोग करेगी। मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर 2026 को होगी। इस बीच हाईकोर्ट की रजिस्ट्री को मामले से संबंधित आवश्यक प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं पूरी करने का निर्देश दिया गया है।

No Comments:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

National News

Politics