गंगटोक : सिक्किम विधानसभा के अध्यक्ष मिंग्मा नोरबू शेरपा और उपाध्यक्ष राज कुमारी थापा ने विधानसभा के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ 17 सितम्बर को दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन स्थित केप टाउन इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन (सीपीए) की आम सभा में भाग लिया।
69वें कॉमनवेल्थ संसदीय सम्मेलन के तहत आयोजित आम सभा की अध्यक्षता सीपीए अध्यक्ष एवं दक्षिण अफ्रीका की नेशनल काउंसिल ऑफ प्रोविंसेज की चेयरपर्सन रिफिलवे मत्शवेनी-छिपाने ने की। सम्मेलन में 100 से अधिक सीपीए शाखाओं के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जिनमें 50 सीपीए स्मॉल ब्रांच भी शामिल थीं।
आम सभा का प्रमुख आकर्षण ‘कॉमनवेल्थ के लिए नेतृत्व के नए अवसर: लोकतंत्र और अंतरराष्ट्रीय कानून को मजबूत करने में संसदीय भूमिका’ विषय पर आयोजित चर्चा रही। इसमें कनाडा, भारत, ब्रिटेन, पाकिस्तान, फिजी, सिंगापुर, बोत्सवाना, केन्या, माल्टा, साइप्रस सहित विभिन्न देशों और क्षेत्रों के संसदीय प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे।
भारत के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने भी सभा को संबोधित किया। उन्होंने संसदीय नेतृत्व, लोकतांत्रिक मूल्यों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े विषयों पर भारत का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
बैठक में सीपीए को एक अंतरराष्ट्रीय अंतर-संसदीय संगठन के समान नई कानूनी स्थिति प्रदान करने की दिशा में हुई प्रगति की जानकारी भी दी गई। इसके साथ ही संगठनात्मक बदलाव और सीपीए चैरिटेबल फंड्स की स्थापना से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। साथ ही, आम सभा ने वर्ष 2025 की सीपीए वार्षिक रिपोर्ट, लेखा-परीक्षित वित्तीय विवरण, सदस्यता रिपोर्ट और बजट एवं वित्तीय प्रबंधन रिपोर्ट को मंजूरी दी। कॉमनवेल्थ महिला सांसद, दिव्यांग सांसदों तथा सीपीए स्मॉल ब्रांच से संबंधित रिपोर्टों का भी अनुमोदन किया गया।
इस अवसर पर पहली बार ग्रीन मेस अवार्ड्स प्रदान किए गए, जिनके माध्यम से पर्यावरणीय स्थिरता के क्षेत्र में संसदीय प्रतिबद्धता और उल्लेखनीय कार्यों को सम्मानित किया गया। साथ ही घोषणा की गई कि 70वां कॉमनवेल्थ संसदीय सम्मेलन वर्ष 2027 में कनाडा की संसद और सीपीए कनाडा फेडरल ब्रांच की मेजबानी में आयोजित होगा।
सिक्किम के प्रतिनिधिमंडल ने 16 सितम्बर को जलवायु अनुकूलन और लचीलापन, संसदों में एआई के उपयोग, मानवाधिकारों की रक्षा एवं शांति को बढ़ावा देने में संसदों की भूमिका तथा कानून बनने के बाद उसकी समीक्षा और जनता से संसद के जुड़ाव जैसे विषयों पर आयोजित कार्यशालाओं में भी भाग लिया।
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