गेजिंग : जिले के लोअर बर्मेक उच्च संस्कृत विद्यालय में चल रहे 15 दिवसीय ग्रीष्मकालीन शैक्षणिक संवर्धन कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को संस्कृत के साथ विभिन्न भाषाओं, आधुनिक विषयों, योग, व्यक्तित्व विकास और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी शिक्षा दी जा रही है। 17 अगस्त से शुरू हुआ यह कार्यक्रम 31 अगस्त को विशेष समापन समारोह के साथ संपन्न होगा।
राज्य शिक्षा विभाग के भाषा निदेशालय तथा केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के साथ उनमें भाषा ज्ञान, आत्मविश्वास, संस्कार और सीखने के प्रति रुचि बढ़ाना है। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न भाषाओं और विषयों से जुड़े विशेषज्ञ विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। संस्कृत के साथ नेपाली, हिन्दी और अंग्रेजी भाषा का अभ्यास कराया जा रहा है। इसके अलावा विज्ञान, वाणिज्य, अर्थशास्त्र, ज्योतिष, योग और व्यक्तित्व विकास जैसे विषयों से भी विद्यार्थियों को परिचित कराया जा रहा है।
प्रशिक्षण को केवल पुस्तकीय अध्ययन तक सीमित नहीं रखा गया है। संवाद, प्रस्तुति, रचनात्मक गतिविधियों और व्यावहारिक अभ्यास के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी बात अलग-अलग भाषाओं में व्यक्त करने तथा नए शब्द और अभिव्यक्तियां सीखने के अवसर मिल रहे हैं। उल्लेखनीय है कि 1975 में स्थापित लोअर बर्मेक उच्च संस्कृत विद्यालय लंबे समय से संस्कृत शिक्षा और वैदिक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वर्ष 2020-21 से यहां आवासीय गुरुकुल व्यवस्था भी संचालित की जा रही है। गुरुकुल में आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कृत, वेद अध्ययन, योग, नैतिक शिक्षा, संस्कार और आध्यात्मिक ज्ञान का समन्वय किया गया है।
विद्यालय के प्रधानाचार्य पूर्ण नेपाल, शिक्षकों और अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी को कार्यक्रम की सफलता में अहम भूमिका निभाई है। विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों से सीधे संवाद का अवसर मिलने से विद्यार्थियों को नियमित कक्षा से बाहर भी व्यापक ज्ञान अर्जित करने का अवसर मिला है। विद्यालय प्रशासन के अनुसार शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के ज्ञान, कौशल, आत्मविश्वास, मूल्यों और व्यक्तित्व का समग्र विकास करना है। इसी सोच के साथ इस कार्यक्रम को तैयार किया गया है।
विद्यालय के निकट स्थित प्राचीन रातोमाटे शिव मंदिर भी परिसर के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक वातावरण को विशेष स्वरूप प्रदान करता है। मंदिर की घंटियों और गुरुकुल में गूंजते संस्कृत मंत्रों के बीच परंपरा, शिक्षा और संस्कार का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। बताया गया है कि 31 अगस्त को आयोजित होने वाले समापन समारोह में विद्यार्थी 15 दिनों के दौरान अर्जित ज्ञान, अनुभव और उपलब्धियों की प्रस्तुति देंगे। यह कार्यक्रम इस संदेश को मजबूत कर रहा है कि आधुनिक शिक्षा और भाषा-सांस्कृतिक विरासत एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं।
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