गंगटोक : सिक्किम के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (आईपीआर) ने नई दिल्ली में आयोजित सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेते हुए राज्य में रचनात्मक अर्थव्यवस्था, मीडिया और जनसंचार को मजबूत करने की दिशा में केंद्र के साथ सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। विज्ञान भवन में आयोजित इस सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सूचना एवं जनसंपर्क विभागों के सचिव एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
सम्मेलन की अध्यक्षता भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव चंचल कुमार ने की। सिक्किम का प्रतिनिधित्व सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की सचिव अन्नपूर्णा एले, निदेशक सुनील मोथे तथा विभाग के अन्य अधिकारियों ने किया। सम्मेलन में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
सम्मेलन में भारत की रचनात्मक क्षमता और देश की ‘सॉफ्ट पावर’ को मजबूत करने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय पर व्यापक चर्चा हुई। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव चंचल कुमार ने प्रधानमंत्री के उस विजन का उल्लेख किया, जिसके तहत भारत को ‘क्रिएटिव कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड’ के रूप में स्थापित करने और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य के अनुरूप देश की रचनात्मक क्षमता का उपयोग करने पर जोर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि भारत की विशाल रचनात्मक क्षमता देश की सॉफ्ट पावर और वैश्विक उपस्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। रचनात्मक अर्थव्यवस्था के माध्यम से रोजगार के नए अवसर पैदा करने, निवेश आकर्षित करने और भारतीय प्रतिभाओं को वैश्विक मंच उपलब्ध कराने की व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने इस विजन को धरातल पर उतारने के लिए राज्य सरकारों की सक्रिय भागीदारी और केंद्र के साथ सहयोगात्मक प्रयासों को आवश्यक बताया।
सचिव ने कहा कि देश के प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की अपनी अलग सांस्कृतिक पहचान, प्रतिभा और संस्थागत क्षमता है। इसलिए रचनात्मक अर्थव्यवस्था के विकास के लिए एक समान मॉडल नहीं अपनाया जा सकता। उन्होंने राज्य-विशिष्ट सांस्कृतिक खूबियों और स्थानीय प्रतिभाओं को ध्यान में रखते हुए रचनात्मक इकोसिस्टम विकसित करने पर बल दिया।
सम्मेलन में राज्यों के लिए केबल ऑपरेटरों से संबंधित राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) तंत्र, वेव्स 2027 के लिए रोडमैप, वेव्स बाजार और बाजार पहुंच को मजबूत करने, वेवएक्स स्टेट इकोसिस्टम के संचालन तथा क्रिएट इन इंडिया चैलेंज सीजन-2 में राज्यों की भागीदारी जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
इसके अलावा सार्वजनिक सेवा प्रसारण के बुनियादी ढांचे के विस्तार, इंडियन सिने हब (आईसीएच) और फिल्म फैसिलिटेशन ऑफिस (एफएफओ) पोर्टल के दोतरफा एकीकरण तथा फिल्म शूटिंग और लाइव इवेंट की अनुमति के लिए आईसीएच के सिंगल-विंडो पोर्टल को अपनाने पर भी विचार-विमर्श किया गया।
सम्मेलन में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों ने विभिन्न केंद्रीय पहलों के क्रियान्वयन से जुड़े अपने अनुभव और चुनौतियां साझा कीं। अधिकारियों ने राज्य स्तर पर क्षमता निर्माण, बेहतर संचार व्यवस्था और मंत्रालय के साथ नियमित समन्वय को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने रचनात्मक अथवा ऑरेंज इकोनॉमी को मजबूत करने के लिए केंद्र के साथ अधिक निकटता से काम करने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।
बैठक में सार्वजनिक सेवा प्रसारण को राज्य-विशिष्ट कार्यक्रमों, कंटेंट सह-उत्पादन और लोगों तक बेहतर पहुंच के माध्यम से मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। साथ ही लाइव इवेंट क्षेत्र को बढ़ावा देने, डीआईपीआर अधिकारियों के लिए आईआईएमसी के प्रशिक्षण संसाधनों के माध्यम से क्षमता निर्माण तथा प्रेस सेवा पोर्टल के जरिए प्रेस और पत्रिकाओं के पंजीकरण संबंधी डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने पर विचार किया गया।
राज्यों के पुस्तकालयों को मजबूत करने के लिए समग्र शिक्षा ढांचे के तहत पुस्तकों की आपूर्ति और लोगों तक सूचना एवं सेवाओं की बेहतर पहुंच से जुड़े विषय भी सम्मेलन के एजेंडे में शामिल रहे। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव ने राज्य-विशिष्ट सामग्री तैयार करने और उसे अधिक प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाने के लिए पीआईबी के क्षेत्रीय कार्यालयों, राज्य सूचना एवं जनसंपर्क विभागों तथा दूरदर्शन और आकाशवाणी की क्षेत्रीय इकाइयों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि मंत्रालय रचनात्मक अर्थव्यवस्था को मजबूत करने तथा जनता के साथ संचार को अधिक प्रभावी बनाने के लिए राज्यों की नई पहलों, विचारों और साझेदारी के विभिन्न मॉडलों को अपनाने के लिए तैयार है। सम्मेलन में सिक्किम की भागीदारी को राज्य के सूचना एवं जनसंपर्क तंत्र को राष्ट्रीय स्तर पर चल रही मीडिया, रचनात्मक अर्थव्यवस्था और डिजिटल संचार से जुड़ी पहलों के साथ जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्यों और केंद्र के बीच इस तरह का समन्वय स्थानीय प्रतिभाओं, राज्य-विशिष्ट कंटेंट और नई रचनात्मक पहलों को व्यापक राष्ट्रीय एवं वैश्विक मंच उपलब्ध कराने में मददगार हो सकता है।
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