नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है, जिसमें आम आदमी पार्टी के पूर्व विधायक नरेश बालियान को महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम यानी मकोका के तहत दर्ज मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया गया था।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने बालियान की स्पेशल लीव पिटिशन (एसएलपी) पर विचार करते हुए दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है और मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की है। आप के पूर्व विधायक नरेश बालियान ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फ़ैसले को चुनौती दी है जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा जमानत न दिए जाने के खिलाफ उनकी अपील को खारिज कर दिया गया था। यह मामला दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा मकोका के तहत संगठित अपराध के लिए दर्ज किया गया था।
दिल्ली हाई कोर्ट ने 3 अगस्त को दिए अपने फैसले में कहा था कि बालियान और कथित सिंडिकेट के अन्य सदस्यों व उसके सरगना के बीच “साफ़ तौर पर संबंध” था। कोर्ट ने यह भी कहा कि “लगातार गैर-कानूनी गतिविधि” का तत्व भी “साफ़ तौर पर मौजूद” था। जस्टिस मनोज जैन की सिंगल-जज बेंच ने आगे कहा कि चूंकि कथित गैर-कानूनी गतिविधि में आर्थिक फायदा उठाने के मकसद से धमकी और डराना-धमकाना शामिल था, इसलिए मकोका लागू करना गलत नहीं कहा जा सकता।
बालियान ने तर्क दिया था कि वह काफी समय से हिरासत में हैं और अभी तक आरोप तय नहीं किए गए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी लगातार हिरासत संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत तेज़ी से सुनवाई के उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने नरेश बालियान के तर्क को खारिज करते हुए कहा कि तेजी से सुनवाई का अधिकार एक बहुत जरूरी संवैधानिक अधिकार है। लेकिन मकोका जैसे कड़े प्रावधानों वाले संवेदनशील और गंभीर मामलों में सिर्फ लंबे समय तक हिरासत में रहने को जमानत देने का मुख्य और निर्णायक आधार नहीं माना जा सकता।
आपको बता दें कि यह मामला नवंबर 2024 का है। जब गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू के साथ बालियान की कथित बातचीत का ऑडियो क्लिप सामने आया था। इसमें दिल्ली के बिल्डरों से जबरन वसूली की योजना बनाने का आरोप लगा था। रंगदारी के एक मामले में जमानत मिलने के तुरंत बाद दिसंबर 2024 में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने बालियान को मकोका के तहत गिरफ्तार कर लिया था।
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