गंगटोक : सिक्किम की वित्तीय स्थिति को लेकर राज्य में सियासी विवाद तेज हो गया है। विपक्षी सिटिजन एक्शन पार्टी (सीएपी) ने राज्य को दिवालिया करार देते हुए सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए हैं, जबकि सत्तारूढ़ सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) सरकार और भाजपा ने इस दावे को पूरी तरह निराधार, भ्रामक और राजनीतिक बयानबाजी बताया है।
विवाद राज्य का बजट पारित होने के बाद शुरू हुआ, जब सीएपी अध्यक्ष गणेश कुमार राई ने बजट की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि सरकार अत्यधिक कर्ज पर निर्भर है, बेरोजगारी और आय सृजन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों की अनदेखी कर रही है तथा राज्य की वित्तीय स्थिति पर अस्थिर दबाव डाल रही है। मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इस तरह की टिप्पणियां अर्थशास्त्र की अपर्याप्त समझ को दर्शाती हैं और जनता को गुमराह करने का प्रयास हैं।
रविवार को अपने एक टॉक शो में गणेश कुमार राई द्वारा सिक्किम को फिर से दिवालिया बताए जाने के बाद विवाद और गहरा गया। इस पर सिक्किम भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सामान्य सरकारी उधारी और वास्तविक दिवालियापन में बुनियादी अंतर होता है, जिसे जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है।
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता पासांग शेरपा ने कहा कि बिना तथ्यों के सिक्किम को दिवालिया बताना दुर्भाग्यपूर्ण और गैर-जिम्मेदाराना है। उन्होंने कहा कि राज्य का ऋण सेवा भार (राजस्व प्राप्तियों के अनुपात में ब्याज भुगतान) 8.8 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत 12.2 प्रतिशत से काफी कम है। उन्होंने दावा किया कि पंजाब (22.4 प्रतिशत), केरल (20.9 प्रतिशत) और पश्चिम बंगाल (18.3 प्रतिशत) जैसे राज्यों का ऋण सेवा भार सिक्किम की तुलना में कहीं अधिक है।
शेरपा ने कहा कि बार-बार इस प्रकार के दावे निवेशकों के विश्वास को कमजोर कर सकते हैं, राज्य की छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं, वित्तीय संस्थानों में अनिश्चितता पैदा कर सकते हैं तथा पर्यटन और भविष्य के निवेश की संभावनाओं पर प्रतिकूल असर डाल सकते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक आलोचना तथ्यों और ठोस आर्थिक समझ पर आधारित होनी चाहिए, न कि सनसनीखेज आरोपों पर। उनके अनुसार, सार्वजनिक विमर्श का उद्देश्य सिक्किम की अर्थव्यवस्था में विश्वास बढ़ाना होना चाहिए, न कि ऐसी भ्रामक धारणाएं फैलाना जिससे राज्य के दीर्घकालिक हित प्रभावित हों।
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