गंगटोक : सिक्किम के नामची जिलान्तर्गत झोलुंगे स्थित समरदुंग में निर्माणाधीन एनएचपीसी तीस्ता चरण-6 जलविद्युत परियोजना की सुरंग में हुए हादसे के बाद चार दिनों तक चला खोज एवं बचाव अभियान गुरुवार को समाप्त हो गया। अभियान के अंतिम चरण में तीन और शव बरामद किए गए, जिसके बाद मृतकों की कुल संख्या 25 हो गई। सिक्किम सरकार ने घटना के कारणों और परिस्थितियों की जांच के लिए एक उच्च-स्तरीय कमेटी गठित की है। कमेटी को भविष्य में बुनियादी परियोजनाओं में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के उपाय सुझाने का काम भी सौंपा गया है।
नामची जिला प्रशासन के अनुसार, सुरंग के भीतर लापता बताए गए सभी 25 श्रमिकों और अधिकारियों के शव बरामद कर लिए गए हैं। इसके बाद बचाव दलों ने सुरंग का व्यापक निरीक्षण किया और लापता लोगों के रिकॉर्ड का मिलान करने के बाद पुष्टि की कि अब कोई भी श्रमिक भीतर फंसा नहीं है।

मृतकों में एनएचपीसी लिमिटेड, एआरएक्स और पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड से जुड़े कर्मचारी तथा श्रमिक शामिल थे। वे देश के दस राज्यों के निवासी थे। इनमें पश्चिम बंगाल के 11, झारखंड के 4, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के 2-2 तथा केरल, उत्तर प्रदेश, बिहार, सिक्किम, पंजाब और असम के एक-एक व्यक्ति शामिल हैं।
सभी शवों को चिकित्सकीय और कानूनी औपचारिकताओं के लिए सिंगताम जिला अस्पताल, गंगटोक के एसटीएनएम अस्पताल, नामची जिला अस्पताल तथा मणिपाल के सेंट्रल रेफरल अस्पताल में भेजा गया। पहचान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव संबंधित परिवारों को सौंप दिए गए। हादसे के बाद नामची जिला प्रशासन की निगरानी में चलाये गये खोज एवं बचाव अभियान में एनएचपीसी के अधिकारियों के साथ राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, आसनसोल स्थित ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की माइंस रेस्क्यू टीम, सिक्किम पुलिस, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों ने भाग लिया। पूरे अभियान की निगरानी सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने की। अभियान समाप्त होने के बाद जिला प्रशासन ने कठिन परिस्थितियों में समन्वय, पेशेवर दक्षता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने के लिए सभी एजेंसियों तथा बचाव कर्मियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इसी बीच, सिक्किम सरकार ने 20 जुलाई को निर्माणाधीन एडीआईटी-तीन सुरंग के भीतर हुए विस्फोट जैसी घटना की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। गृह विभाग की ओर से 22 जुलाई को जारी अधिसूचना के अनुसार, समिति घटना के कारणों और परिस्थितियों की जांच करेगी तथा भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक सुझाव देगी। समिति की अध्यक्षता पुलिस महानिरीक्षक (कानून-व्यवस्था) ताशी वांग्याल करेंगे। समिति में खान एवं भूविज्ञान विभाग के प्रधान निदेशक फिगू छिरिंग भूटिया, अतिरिक्त निदेशक केशर लुइटेल तथा सीआईडी के डीआईजी तेनजिंग लोदेन लेप्चा को सदस्य बनाया गया है। तेनजिंग लोदेन लेप्चा समिति के सदस्य सचिव भी होंगे।
समिति को सुरंग के भीतर विस्फोट जैसी घटना और उसके बाद गैस जमाव के सटीक कारण, प्रकृति तथा घटनाक्रम का पता लगाने की जिम्मेदारी दी गई है। जांच में यह निर्धारित किया जाएगा कि हादसा ब्लास्टिंग, मीथेन अथवा किसी अन्य जहरीली गैस की मौजूदगी, उपकरणों की खराबी या किसी अन्य कारण से हुआ। समिति यह भी जांच करेगी कि घटना के समय निर्धारित सुरक्षा मानकों, मानक संचालन प्रक्रियाओं, खान अधिनियम, सुरंग सुरक्षा दिशानिर्देशों और विस्फोटक नियम का पालन किया जा रहा था या नहीं। विशेष रूप से सुरंग की वेंटिलेशन व्यवस्था, गैस का पता लगाने वाले उपकरणों और व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों के इस्तेमाल की समीक्षा की जाएगी।
उच्चस्तरीय समिति सुरंग के भीतर लगाए गए गैस डिटेक्शन सेंसर, वेंटिलेशन पंखों और आपातकालीन निकासी प्रणालियों की पर्याप्तता तथा कार्यक्षमता का भी आकलन करेगी। इसके साथ ही लीक हुई गैस के प्रकार और स्रोत का पता लगाया जाएगा। समिति को जांच के दौरान घटना से जुड़े अन्य प्रासंगिक मामलों की समीक्षा करने का भी अधिकार दिया गया है। गृह विभाग ने समिति को अधिसूचना जारी होने की तारीख से 15 दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट, निष्कर्ष और सिफारिशें सक्षम प्राधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया है।
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