पेरिस । फ्रांस में चल रहे जी7 शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस्राइल को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। कतर के अमीर के साथ बैठक में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के बिना इस्राइल का कोई वजूद नहीं होता। उन्होंने दावा किया कि उनके बिना इस्राइल का अस्तित्व नहीं बचता क्योंकि किसी और राष्ट्रपति ने वह हिम्मत नहीं दिखाई जो उन्होंने दिखाई है।
ईरान के साथ इस हफ्ते होने वाले शांति समझौते से पहले ट्रंप ने मांग की है कि इस्राइल लेबनान पर बमबारी तुरंत बंद करे। ट्रंप ने अपने सहयोगी बेंजामिन नेतन्याहू के बारे में कहा कि उनके साथ मेरे रिश्ते अच्छे रहे हैं, लेकिन अब उन्हें लेबनान के मामले में ज्यादा जिम्मेदार होना पड़ेगा। ट्रंप ने लेबनान में इस्राइल के हमलों को क्रूर और हद से ज्यादा बताया।
यह नाराजगी तब और बढ़ गई जब ईरान के साथ शांति समझौते के फाइनल होने से ठीक दो घंटे पहले इस्राइल ने बेरूत पर बमबारी कर दी। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने इस हमले के बाद नेतन्याहू से बेहद कड़े शब्दों में नाराजगी जताई। ट्रंप ने कहा कि उन्हें इस हमले का समय और तरीका बिल्कुल पसंद नहीं आया।
दूसरी तरफ, इस्राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू इस शांति समझौते से काफी नाराज हैं। उन्होंने सोमवार को एक मीडिया वार्ता में कहा कि इस्राइल को ईरान और उसके साथियों से खतरा बना हुआ है। उन्होंने साफ किया कि इस्राइल ने गाजा, लेबनान और सीरिया में जो सुरक्षा क्षेत्र बनाए हैं, वह वहां तब तक रहेगा जब तक देश की सुरक्षा के लिए जरूरी हो।
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, दो मार्च से अब तक इस्राइली हमलों में 3,756 लोग मारे गए हैं और 11,000 से ज्यादा घायल हुए हैं। ट्रंप ने कहा कि हिजबुल्लाह के किसी एक सदस्य को ढूंढने के लिए पूरी रिहायशी इमारत को गिराना सही नहीं है क्योंकि वहां मासूम लोग भी रहते हैं।
ट्रंप ने एक नया सुझाव देते हुए कहा कि अगर इस्राइल मासूमों को मारे बिना हिजबुल्लाह को नहीं रोक सकता, तो यह काम सीरिया को करने देना चाहिए। उन्होंने सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरा की तारीफ की और कहा कि वे इस काम को बेहतर तरीके से कर सकते हैं। ट्रंप ने संकेत दिया कि अगर नेतन्याहू नहीं माने, तो अमेरिका हिजबुल्लाह से निपटने के लिए सीरिया के साथ साझेदारी कर सकता है।
ईरान के साथ होने वाले शांति समझौते पर ट्रंप ने भरोसा जताया कि यह सफल होगा। उन्होंने उन अफवाहों को भी खारिज किया जिनमें कहा जा रहा था कि अमेरिका ईरान को पैसा दे रहा है। इस समझौते को पाकिस्तान और कतर की कोशिशों से मुमकिन बनाया गया है। कतर के अमीर ने भी इस समझौते का स्वागत किया और इसे पूरे खाड़ी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बताया।
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