गंगटोक : केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय ने सिक्किम के लिए बड़ी वित्तीय सहायता की घोषणा की है। मंत्रालय ने सिक्किम को सतत विकास, जैविक खेती और पर्यावरण अनुकूल विकास के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में रेखांकित किया है।
हाल ही में सिक्किम के 51वें राज्य दिवस समारोह में भाग लेने गंगटोक आए केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने महत्वाकांक्षी “मिशन सिक्किम ऑर्गेनिक्स” पहल का शुभारंभ किया था। इस योजना की कुल अनुमानित लागत 360 करोड़ है। इसका उद्देश्य सिक्किम को वैश्विक स्तर पर जुड़ी हुई प्रीमियम जैविक अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित करना है। इस कार्यक्रम से राज्य के 66 हजार से अधिक किसान परिवारों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
केंद्रीय मंत्री ने पिछले महीने के अपने संदेश में कहा कि केंद्र सरकार की एक्ट ईस्ट नीति के तहत सिक्किम पारिस्थितिक संरक्षण, जिम्मेदार पर्यटन और जैविक कृषि के क्षेत्र में देश के सबसे मजबूत उदाहरणों में से एक बनकर उभरा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 360 करोड़ की इस योजना में पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय की ओर से 85 करोड़ की सहायता आधारभूत संरचना, एग्रीगेशन सिस्टम और कार्यक्रम समन्वय के लिए दी जाएगी। इसके अलावा केंद्रीय मंत्रालयों, नाबार्ड, एपीडा और निजी क्षेत्र के निवेश के माध्यम से भी अतिरिक्त सहयोग प्राप्त होगा।
राज्य दिवस कार्यक्रम के दौरान केंद्र की ओर से सिक्किम में 223 करोड़ की 21 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया गया। इन परियोजनाओं में सडक़, पुल, पर्यटन आधारभूत संरचना और सार्वजनिक संपर्क से जुड़े कार्य शामिल हैं, जिनका उद्देश्य क्षेत्रीय आवागमन और आर्थिक अवसरों को मजबूत करना है।
केंद्रीय मंत्री के दौरे के दौरान नामची स्थित तेमी टी एस्टेट के विकास, तार्कू में निर्माणाधीन कंचनजगा स्टेट यूनिवर्सिटी परिसर और पीएम-डेवाइन के तहत भालेढुंगा स्काईवॉक परियोजना जैसे प्रमुख कार्यों की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने कहा कि ये परियोजनाएं सिक्किम के संतुलित विकास और पर्यावरण संरक्षण आधारित मॉडल को दर्शाती हैं।
वहीं, सरमसा स्थित ऑर्किडेरियम के दौरे और गंगटोक के एमजी मार्ग पर स्थानीय लोगों से बातचीत के बाद सिंधिया ने सिक्किम के जैव विविधता संरक्षण प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सिक्किम की समृद्ध संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण की भावना और जैविक पहचान राज्य को पूर्वोत्तर ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक अग्रणी उदाहरण बनाती है।
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