ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री पर टैक्स का शिकंजा, प्रियंका चतुर्वेदी ने फैसले को सराहा

नई दिल्ली । शिवसेना (यूबीटी) नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को जमकर खरी-खोटी सुनाई। इन कंपनियों के खिलाफ आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का प्रियंका ने पूर्ण समर्थन किया। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने एक दिन पहले ही ऑनलाइन गेमिंग की फेस वैल्यू पर 28 फीसदी टैक्स लगाने के फैसले को सी ठहराया था। कोर्ट के इस आदेश की ही शिवसेना यूबीटी सांसद ने जमकर तारीफ की है।

दरअसल, ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये (जुर्माने सहित) की जीएसटी चोरी के लिए कारण बताओ नोटिस मिले थे। सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग की पूरी फेस वैल्यू पर 28 प्रतिशत टैक्स लगाने के फैसले को सही ठहराया था और लॉटरी, सट्टेबाजी, जुआ, घुड़दौड़ और कसीनो के लिए टैक्सेबल सप्लाई का मूल्यांकन तय करने के सीजीएसटी नियमों को भी मान्य करार दिया था।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और आर. महादेवन ने कहा था कि ऑनलाइन गेम्स पर जीएसटी लगाने में कोई संवैधानिक कमी नहीं है। उन्होंने इसे वैध घोषित किया था। पिछले साल जून में कोर्ट ने 49 गेमिंग कंपनियों के खिलाफ जीएसटी की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी, क्योंकि उन्हें पिछली तारीख से टैक्स चुकाने के नोटिस मिले थे। कोर्ट ने उन्हें दी गई सुरक्षा को और तीन महीने के लिए बढ़ा दिया था।

अक्टूबर 2023 में जीएसटी काउंसिल ने ऑनलाइन गेमिंग की पूरी दांव राशि पर 28 प्रतिशत टैक्स लगाया था। हालांकि, गेमिंग इंडस्ट्री की मांग रही है कि टैक्स की गणना फेस वैल्यू के बजाय कुल गेमिंग रेवेन्यू पर की जानी चाहिए। इस पर कंपनियों को कारण बताओ नोटिस मिले थे, जिनमें उन पर 1.12 लाख करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी का आरोप लगाया गया था। जीएसटी कानून के तहत टैक्स की मांग का 100 प्रतिशत तक जुर्माना लगाने का प्रावधान है, इसलिए कंपनियों की कुल देनदारी लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सरकार सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए ऐसी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला ले सकती है। ऑनलाइन कंपनियां किसी भी व्यापार या व्यवसाय को करने के मौलिक अधिकार के उल्लंघन का दावा नहीं कर सकतीं। जस्टिस जेबी पारदीवाला और आर महादेवन की पीठ ने तमिलनाडु सरकार और कर्नाटक सरकार द्वारा पैसे या दांव पर खेले जाने वाले ऑनलाइन खेलों को प्रतिबंधित करने और उन्हें अपराध घोषित करने के फैसलों को सही ठहराया।

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